धनबाद: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) धनबाद महानगर ने झारखंड के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लागू की जा रही “Self Financed Course” व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा। परिषद ने विश्वविद्यालय अंतर्गत स्नातकोत्तर प्रबंधन, जनसंचार, कंप्यूटर साइंस, विधि शिक्षा एवं विदेशी भाषा विभागों के पुनर्गठन तथा पद समर्पण की प्रक्रिया को तत्काल वापस लेने की मांग की।
परिषद का कहना है कि पूरे झारखंड में केवल BBMKU के अंतर्गत इन विभागों में संबंधित पाठ्यक्रम सरकार के वित्तीय सहयोग से संचालित हो रहे हैं, जबकि अब इन्हें Self Financed Course के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। ABVP ने इसे छात्र हितों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि इस व्यवस्था से छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, नियमित कक्षाएं प्रभावित होंगी तथा ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा।
विभाग संयोजक सुधांशु गुप्ता ने कहा कि यदि विभागों में सृजित पदों का समर्पण कर उन्हें Self Financed स्वरूप में बदला गया, तो संबंधित पाठ्यक्रमों की फीस में अत्यधिक वृद्धि होने की संभावना है। इससे गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों की पेशेवर एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तक पहुंच प्रभावित होगी और वे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं।
ABVP ने कुलपति के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं—
स्व-वित्तपोषित किए गए विभागों में पद समर्पण की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्थगित की जाए।
पूर्व से संचालित विभागों में स्वीकृत एवं सृजित पदों को यथावत सुरक्षित रखा जाए।
नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत पूर्व स्वीकृत पदों को सुरक्षित रखते हुए की जाए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता एवं विद्यार्थियों के अवसर प्रभावित न हों।
छात्र हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी विभागों का नियमित एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर महानगर संगठन मंत्री हरगोविंद कुमार पाठक, विश्वविद्यालय मंत्री सचिन चंद्र, सोनू गांधी एवं सान्दीपा चौधरी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।





















