जमुआ: रविवार अहले सुबह जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव ने पूरे विधि-विधान और आस्था के साथ बाबा की समाधि पर पहली चादरपोशी की। इसके बाद आम श्रद्धालुओं द्वारा चादरपोशी का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक लगातार जारी रहा।
हर वर्ष पौष पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाला यह समाधि पर्व हिन्दू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। यहां हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई—सभी धर्मों के लोग समान श्रद्धा के साथ बाबा की समाधि पर मत्था टेकने पहुंचते हैं।
श्रद्धालु न केवल गिरिडीह जिले, बल्कि झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से बाबा की चादरपोशी के लिए पहुंचे थे।
परंपरा के अनुसार, पहले प्रहर में हिन्दू समुदाय के भक्तों ने चादरपोशी की, जबकि दोपहर बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बाबा की दरगाह पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।






















