Fake Ghee Adulteration News: पूरे देश में खाने-पीने की चीज़ों में मिलावट के खिलाफ़ कार्रवाई तेज़ हो गई है। अहमदाबाद, लुधियाना, कानपुर और हैदराबाद में अधिकारियों और पुलिस ने अलग-अलग ऑपरेशन चलाकर नकली घी, मसाले और खाने-पीने की दूसरी चीज़ें बनाने और बेचने वाले बड़े नेटवर्क का पर्दाफ़ाश किया है। इन ऑपरेशन के दौरान लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का सामान ज़ब्त किया गया है। मामले की जांच चल रही है और संबंधित एजेंसियां सैंपल की जांच करवा रही हैं।
Highlights:
अहमदाबाद में 30,000 लीटर संदिग्ध नकली घी ज़ब्त
अहमदाबाद में पुलिस ने एक फ़ैक्टरी पर छापा मारा और लगभग 30,000 लीटर संदिग्ध नकली घी ज़ब्त किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फ़ैक्टरी में पामोलिन तेल और दूसरे केमिकल का इस्तेमाल करके घी जैसा प्रोडक्ट बनाया जा रहा था। इसके अलावा, लगभग 50,000 लीटर केमिकल भी ज़ब्त किए गए; इनका इस्तेमाल किसलिए किया जाना था, इसकी जांच चल रही है। गांधीनगर रेंज के DIG वीरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान करोड़ों रुपये का संदिग्ध सामान ज़ब्त किया गया। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
लुधियाना में भी संदिग्ध घी का स्टॉक मिला
पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने एक गोदाम से लगभग 3,000 लीटर संदिग्ध घी ज़ब्त किया। शुरुआती जांच से पता चला है कि यह खेप गुजरात से लाई गई थी। घी के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर में नकली मसाला फ़ैक्टरी पर छापा
उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य विभाग ने एक फ़ैक्टरी पर छापा मारा और बड़ी मात्रा में संदिग्ध मसाले ज़ब्त किए। अधिकारियों को शक है कि हल्दी, मिर्च और धनिया पाउडर बनाने में घटिया क्वालिटी के कच्चे माल और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया गया था। विभाग ने लगभग ₹5.86 लाख कीमत के मसाले ज़ब्त किए हैं और जांच शुरू कर दी है।
हैदराबाद में मसालों में मिलावट की जांच
हैदराबाद में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन के दौरान लौंग और जीरा ज़ब्त किया गया, जिन पर कृत्रिम रंग चढ़ा हुआ लग रहा था। पुलिस और संबंधित विभागों ने सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे खाने-पीने की चीज़ें सिर्फ़ भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदें।
खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएं
संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच सालों में देश भर में लिए गए 8.86 लाख खाने-पीने के सैंपल में से लगभग 20 प्रतिशत सैंपल क्वालिटी के मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट से पता चलता है कि ज़्यादातर मामलों में जुर्माना तो लगाया गया, लेकिन सज़ा बहुत कम मामलों में ही हो पाई। जानकार सलाह देते हैं कि खाने-पीने की चीज़ें खरीदते समय ग्राहक क्वालिटी, पैकेजिंग, लाइसेंस और भरोसेमंद ब्रांड का ध्यान रखें। वहीं, जांच एजेंसियां मिलावट से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं।






















