Govindpur Registry Office: गोविंदपुर निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि झारखंड सरकार की ओर से डीड लेखन के लिए निर्धारित नियमों के बावजूद कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर तीन दर्जन से अधिक लोग बिना वैध अनुज्ञप्ति के डीड तैयार करने का काम कर रहे हैं। जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री कराने पहुंचने वाले लोगों को ये कथित डीड राइटर दस्तावेज तैयार कराने की सुविधा देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना लाइसेंस डीड लेखन का काम किसकी अनुमति से चल रहा है और संबंधित विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
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स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि डीड तैयार कराने के नाम पर खरीदारों और विक्रेताओं से मनमानी रकम वसूली जाती है। इसके अलावा कुछ बाहरी व्यक्तियों की निबंधन कार्यालय के अंदर तक कथित पहुंच और दस्तावेजों से जुड़े कामों में हस्तक्षेप की चर्चा है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह निबंधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
कार्यालय के बाहर तीन दर्जन से अधिक कथित डीड राइटर सक्रिय
गोविंदपुर निबंधन कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर बैठने वाले कथित डीड राइटरों की संख्या तीन दर्जन से अधिक बताई जा रही है। ये लोग जमीन की रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों के लिए डीड तैयार करने का काम करते हैं। हालांकि, इनमें कितने लोगों के पास विभाग की वैध अनुज्ञप्ति है और कितने बिना अनुमति के काम कर रहे हैं, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस मामले में जिला प्रशासन और निबंधन विभाग से सभी डीड लेखकों की सूची तथा उनके लाइसेंस की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुज्ञप्ति डीड लेखन कर रहा है, तो उसके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
जनरेटर ऑपरेटर से लिपिकीय काम तक साधन कुंभकार की भूमिका पर सवाल
निबंधन कार्यालय में साधन कुंभकार नामक युवक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्यालय के शुरुआती दिनों में वह जनरेटर संचालन का काम करता था। आरोप है कि समय के साथ कार्यालय के अंदर उसकी सक्रियता बढ़ी और वह जनरेटर चलाने के अलावा सरकारी दस्तावेजों की नंबरिंग तथा उन पर मुहर लगाने जैसे कामों में भी शामिल होने लगा।
हाल के दिनों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से उसकी बहाली झाड़ू-कस के पद पर होने की बात कही जा रही है। हालांकि, आरोप है कि वह अपने निर्धारित सफाई कार्य के बजाय लिपिकीय कामों में अधिक सक्रिय रहता है। यह भी दावा किया जा रहा है कि सफाई कार्य के लिए उसने अलग से एक व्यक्ति को रखा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आउटसोर्सिंग के तहत नियुक्त कर्मचारी को दस्तावेजों की नंबरिंग और मुहर लगाने जैसे कार्य करने की अनुमति किसने दी है? क्या इसके लिए कोई विभागीय आदेश जारी किया गया है? इन सवालों पर निबंधन विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
वसीम अकरम की रजिस्ट्री और अंचल कार्यालय में कथित सक्रियता
गोविंदपुर निबंधन कार्यालय के साथ-साथ अंचल कार्यालय में वसीम अकरम नामक व्यक्ति की कथित सक्रियता को लेकर भी चर्चा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद जमीन के दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन से जुड़े कामों में भी उसकी भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ कथित डीड राइटर जमीन के खरीदारों से दाखिल-खारिज कराने की जिम्मेदारी लेते हैं और इसके बाद संबंधित काम वसीम अकरम को सौंप देते हैं। उसे निबंधन कार्यालय और अंचल कार्यालय दोनों जगह सक्रिय देखे जाने की बात कही जा रही है।
यदि निजी व्यक्तियों के माध्यम से दाखिल-खारिज कराने के नाम पर काम लिया जा रहा है, तो इसकी वैधता और प्रक्रिया की जांच आवश्यक है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या किसी निजी व्यक्ति को सरकारी प्रक्रिया के तहत इस तरह की जिम्मेदारी निभाने की आधिकारिक अनुमति है और इसके नाम पर किसी प्रकार की राशि वसूली जा रही है या नहीं।
निबंधन कार्यालय की व्यवस्था पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
गोविंदपुर निबंधन कार्यालय में सामने आए इन आरोपों के बाद पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जिला प्रशासन, जिला अवर निबंधक और निबंधन विभाग से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है कि कार्यालय के बाहर डीड लेखन करने वाले लोगों के पास वैध अनुज्ञप्ति है या नहीं। इसके साथ ही यह जांच भी जरूरी है कि कथित तौर पर बाहरी व्यक्ति सरकारी दस्तावेजों की नंबरिंग और मुहर लगाने जैसे कार्यों में कैसे शामिल हो रहे हैं। आउटसोर्सिंग कर्मियों को निर्धारित जिम्मेदारियों से अलग लिपिकीय काम सौंपने के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।
दाखिल-खारिज के नाम पर निजी व्यक्तियों के माध्यम से काम कराने और कथित रूप से राशि वसूली के मामलों की वास्तविकता सामने आना भी जरूरी है। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और निबंधन विभाग मामले का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं।






















