होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पवित्र पर्व है। यह त्योहार फाल्गुन महीने की पूर्णिमा की रात मनाया जाता है और इसे छोटी होली भी कहा जाता है। इस दिन लोग मिलकर होलिका की अग्नि प्रज्वलित करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं।
Highlights:
पौराणिक कथा
होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु और उनके परम भक्त प्रह्लाद से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद को उसकी दुष्ट बुआ होलिका से बचाया था। इसी घटना की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।
होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी यानी रंगों वाली होली खेली जाती है।
2026 में कब करें होलिका दहन?
साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि:
शुरू – 2 मार्च 2026, शाम 5:55 बजे
समाप्त – 3 मार्च 2026, शाम 5:07 बजे
लेकिन 3 मार्च 2026 को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा, जो भारत में दिखाई देगा।
ग्रहण के दिन शुभ कार्य और पूजा-पाठ नहीं किए जाते, इसलिए:
- होलिका दहन 2 मार्च 2026 (सोमवार) को ही किया जाएगा।
- रंगों वाली होली (धुलेंडी) 4 मार्च 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी।
शुभ मुहूर्त (2 मार्च 2026)पंचांग के अनुसार:
शाम 6:20 बजे से रात 12:00 बजे तक होलिका दहन का शुभ समय है।
शास्त्रों में पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में होलिका दहन करना सर्वोत्तम माना गया है।
होलिका दहन का महत्व
- बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश
- जीवन में सुख-समृद्धि की कामना
- परिवार की सुरक्षा और मंगल की प्रार्थना
मान्यता है कि अपनी परेशानियों और दुखों को होलिका की अग्नि में समर्पित करने से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।






















