ड्रोन हमलों के बाद भारत का बड़ा कदम, पाकिस्तान को 90% कम मिला पानी
नई दिल्ली, 10 मई 2025: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब जल कूटनीति (Water Diplomacy) शुरू हो गई है। गुरुवार रात पाकिस्तान द्वारा भारतीय सीमा पर ड्रोन हमलों की नाकाम कोशिशों के बाद, भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस फैसले के तहत, भारत ने सलाल और बगलिहार डैम के गेट खोलकर पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी की आपूर्ति में भारी कटौती कर दी है।
Highlights:
पाकिस्तान ने किया ड्रोन हमला, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब
गुरुवार देर रात पाकिस्तान ने एक बार फिर भारतीय सीमा पर ड्रोन हमले की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया। इसके अगले दिन शुक्रवार सुबह एक और ड्रोन हमला हुआ, लेकिन भारतीय वायुसेना और सुरक्षा बलों की चौकसी और सटीकता के चलते यह हमला भी विफल कर दिया गया।
इस हमले के जवाब में, भारत ने कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को घेरने के लिए सिंधु जल संधि पर सख्त रुख अपनाया।
यह भी पढ़े : ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने पाकिस्तान को दिया मुंहतोड़ जवाब, एयर डिफेंस सिस्टम ने 15 शहरों पर हमले को किया नाकाम
सलाल और बगलिहार डैम के गेट खोलने से पाकिस्तान में हड़कंप
शुक्रवार सुबह भारत ने चिनाब नदी पर स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना के तीन गेट और रामबन में बगलिहार डैम का एक गेट खोल दिया। इससे पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी की मात्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई।
एएनआई द्वारा जारी किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि सुबह 8:15 बजे के करीब बगलिहार डैम का गेट खोला गया, जिससे पाकिस्तान में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत ने पहले घटाया था जलस्तर, अब पानी की आपूर्ति पर लगा प्रतिबंध
भारत पहले ही गुरुवार को चिनाब नदी का जलस्तर घटा चुका था। बगलिहार और सलाल डैम के गेट बंद कर दिए गए थे, जिससे पाकिस्तान को काफी कम पानी मिला।
हालांकि, भारत ने पर्यावरणीय संतुलन और जलजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डैम के एक-एक गेट से नियंत्रित रूप से पानी छोड़ने का फैसला किया, जिससे जल-जीवन प्रभावित न हो।
पाकिस्तान को 90% कम पानी, कृषि संकट की आशंका
सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) पाकिस्तान के प्रवक्ता मुहम्मद खालिद इदरीस राणा के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान को मिलने वाले पानी में लगभग 90% तक कटौती कर दी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति बनी रही तो इस्लामाबाद को अपने खेतों में पानी की आपूर्ति 20% तक कम करनी पड़ सकती है। इससे पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है।
क्या है सिंधु जल संधि और इसका असर?
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) पर हस्ताक्षर हुए थे।
- भारत को रावी, व्यास और सतलज नदियों पर पूरा नियंत्रण मिला।
- पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का 80% जल मिला।
- भारत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) से सीमित जल उपयोग का अधिकार मिला।
अब भारत ने इस संधि को अस्थायी रूप से निलंबित कर, पाकिस्तान पर जल आपूर्ति के माध्यम से दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
भारत का जल रणनीति के जरिए जवाब
भारत ने हमेशा पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थक रवैये और संघर्षविराम उल्लंघनों को लेकर आपत्ति जताई है। लेकिन अब जल शक्ति (Water Power) का इस्तेमाल कर कूटनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो पाकिस्तान की जल और कृषि व्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है।
भारत-पाकिस्तान तनाव अब सिर्फ सीमा संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जल आपूर्ति और संसाधन नियंत्रण तक फैल चुका है।
ड्रोन हमलों के जवाब में भारत की सैन्य शक्ति तो दिखी ही, अब जल शक्ति का प्रभाव भी सामने आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा या बातचीत का रास्ता खुलेगा?






















