निरसा :निरसा के बारबिंदिया स्थित मैथन थर्मल विस्थापित एवं स्थानीय समिति आवासीय कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया आयोजित बैठक में मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष अशोक मंडल उपस्थित थे इसके अलावा आयोजित बैठक में काफी संख्या में एमपीएल पॉवर प्लांट में कार्यरत सुरक्षा कर्मी थे बैठक में आए एमपीएल पॉवर प्लांट में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों ने अपनी समस्याओ को अशोक मंडल के समक्ष रखा बैठक के माध्यम से समिति के अध्यक्ष अशोक मंडल ने कहा कि एमपीएल पॉवर प्लांट में कार्यरत सभी सुरक्षाकर्मियों को प्रबंधन को उसका वाजिब हक देना होगा। जब प्लांट में कार्यरत अन्य कंपनियों के मजदूरों को 3800 सौ रुपए भता के रूप में मिलता है तो सुरक्षा कर्मियों को सिर्फ ₹1200 क्यों? सुरक्षा कर्मी जितने दिन ड्यूटी करते हैं उतने दिन का ही पैसा मिलता है। जबकि नियमानुसार उन्हें भी सप्ताह में एक दिन छुट्टी का अधिकार है तथा छुट्टी के पैसे का भुगतान सुरक्षा कर्मियों को मिलना चाहिए बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जो सुरक्षाकर्मी 14 वर्ष से कार्यरत हैं तथा जिनकी तत्काल नियुक्ति होती है सभी का बेसिक वेतनमान एक ही है। यह कहीं से भी न्याय संगत नहीं है। सुरक्षा कर्मियों को भी अर्ध कुशल से कुशल मजदूर के रूप में पदोन्नति कर उन्हें उसका वेतनमान दिया जाना चाहिए। सभी सुरक्षाकर्मी इकट्ठा होकर एक साथ लड़े उनकी मांगों को प्रबंधन मानना होगा।
अशोक मंडल ने कहा कि एमपीएल संयंत्र निर्माण के समय ही झारखंड के कोडरमा एवं पश्चिम बंगाल के अंडाल एवं रघुनाथपुर में भी पावर प्लांट बैठा। वहां के विस्थापतिकों को आज तक नियोजन नहीं मिला है। एमपीएल प्लांट के विस्थापितों ने अपनी लड़ाई स्वयं लड़ी। 1500 विस्थापन में 1100 को नियोजन मिल चुका है तथा 300 लोगों ने नियोजन के बदले पैसे ले लिए हैं। सबसे अच्छा की बात तो यह है कि इतिहास में पहली बार विशाल पहाड़ी गांव के डेड डिसमिल जमीन के बदले एक ही परिवार के नौ लोगों को नियोजन मिला। यदि अभी भी विस्थापित आपस में संगठित रहे तो प्रबंधन को सभी मांगे माननी होगी।






















