Navratri 2026 Day 6: शारदीय नवरात्रि का छठा दिन आज, 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। माता को शहद प्रिय माना जाता है। ऐसे में भक्त पूजा के दौरान शहद या उससे बनी मिठाई का भोग अर्पित करते हैं। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, शुभ रंग और मंत्र।
Highlights:
मां कात्यायनी पूजा का शुभ मुहूर्त
16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की पूजा के लिए बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:51 बजे से 6:16 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:51 बजे से रात 7:06 बजे तक
भक्त अपनी सुविधानुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं। हालांकि, मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित है।
कैसा है मां कात्यायनी का स्वरूप?
मां कात्यायनी को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी चार भुजाएं हैं। माता के दाहिने हाथ अभय मुद्रा और वर मुद्रा में हैं, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल सुशोभित हैं। मां सिंह पर सवार रहती हैं। माता का यह स्वरूप भक्तों को निर्भयता, आत्मविश्वास और बुराइयों के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के छठे दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर माता से सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के लिए इन चरणों का पालन किया जा सकता है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
- मां कात्यायनी का ध्यान करते हुए उन्हें फूल अर्पित करें।
- माता को अक्षत, कुमकुम, सिंदूर और लाल फूल चढ़ाएं।
- श्रद्धानुसार धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- घी या कपूर से माता की आरती करें।
- मां के मंत्रों का जाप कर सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।
पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है।
मां कात्यायनी की पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को मनोकामनाएं पूरी करने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना को वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और विवाह में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से यमुना तट पर मां कात्यायनी की पूजा की थी। इसी कारण विवाह की कामना करने वाले कई श्रद्धालु भी माता की विशेष आराधना करते हैं।
मां कात्यायनी का प्रिय भोग और शुभ रंग
मान्यता है कि मां कात्यायनी को शहद प्रिय है। इसलिए नवरात्रि के छठे दिन माता को शहद या शहद से बना हलवा अर्पित किया जाता है। कुछ परंपराओं में इस दिन ग्रे रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार माता को भोग लगाते हैं और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
मां कात्यायनी के मंत्र
बीज मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
वैकल्पिक मंत्र
ॐ ह्रीं नमः।
स्तुति मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
ध्यान मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के दौरान श्रद्धालु इन मंत्रों का जाप कर माता से शक्ति, साहस और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।






















