बोकारो: देश के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंके जाने की घटना के बाद देशभर में दलित समाज और संविधान समर्थकों में आक्रोश व्याप्त है। इसी के तहत बोकारो जिले के बेरमो में अंबेडकर विचार विकास मंच के बैनर तले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया।
Highlights:
बेरमो के जरीडीह मोड़ पर सोमवार को अंबेडकर विचार विकास मंच की अगुवाई में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया गया। धरना का उद्देश्य हाल ही में कोर्ट परिसर में देश के मुख्य न्यायाधीश पर एक वकील द्वारा जूता फेंके जाने की घटना का विरोध दर्ज कराना था।
धरने में केवल दलित समाज के लोग ही नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाले नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसे दिल्ली भेजा जा रहा है।
पाँच सूत्रीय माँग पत्र सौंपा गया, जिसमें मुख्य माँगें शामिल हैं:
- मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने वाले वकील पर कड़ी कार्रवाई।
- हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार की संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय जांच।
- दलितों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न पर रोक लगाने हेतु ठोस नीति।
- संविधान और न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा के लिए कड़े कदम।
- प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।
धरना में शामिल वक्ताओं ने कहा:
“यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह देश की न्यायपालिका और संविधान की गरिमा पर हमला है। हम चुप नहीं बैठेंगे।”
आंदोलन की विशेषताएं:
- शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीका अपनाया गया।
- धरना स्थल पर संविधान की प्रतियां और बाबा साहब अंबेडकर के पोस्टर प्रदर्शित किए गए।
- समाज के हर वर्ग से समर्थन मिला।
आयोजकों ने कहा:
“यह विरोध सिर्फ एक घटना के खिलाफ नहीं, बल्कि एक मानसिकता के खिलाफ है, जो संविधान को कमजोर करना चाहती है।”





















