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Friday, October 30, 2026

मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का अवतरण दिन – श्रीरामनवमी…

धनबाद: चैत्र शुक्ल नवमी का पावन दिन हम सबके लिए अत्यंत मंगलमय है, क्योंकि इसी दिन अयोध्या में धर्म, मर्यादा और आदर्श के प्रतीक भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ।
इस दिन जब पुष्य नक्षत्रपर, मध्यान्ह के समय, कर्क लग्न में सूर्यादि पांच ग्रह थे, तब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ। इस उपलक्ष्य में श्रीरामनवमी मनाई जाती है। अनेक राममंदिरों में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर नौ दिन तक यह उत्सव मनाया जाता है। रामायण पाठ, भजन – कीर्तन तथा श्रीराम की मूर्ति का विविध शृंगार कर, श्रद्धापूर्वक पूजा – अर्चना की जाती है। नवमी के दिन दोपहर में श्रीराम जन्म का कीर्तन किया जाता है।
इस दिन श्रीराम का व्रत भी रखा जाता है । ऐसा कहा गया है कि यह व्रत करने से सभी व्रतों का फल प्राप्त होता है तथा सर्व पापों का क्षालन होकर अंत में उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है ।
परंतु श्रीरामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।

रामायण – जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा

रामायण केवल एक कथा नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की दिशा है। जब श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला, तो माता सीता ने प्रेम और समर्पण से उनका साथ चुना। लक्ष्मण ने भी अपने बड़े भाई की सेवा को जीवन का ध्येय बना लिया।
किन्तु सबसे अद्भुत उदाहरण है उर्मिला का त्याग। उन्होंने बिना किसी आग्रह के लक्ष्मण को राम सेवा हेतु भेज दिया। 14 वर्षों तक उन्होंने तपस्विनी की भाँति धैर्य और त्याग का जीवन जिया। भैया-भाभी की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं, परंतु उर्मिला ने भी अपने महल के द्वार कभी बंद नहीं किए और सारी रात जाग-जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया।

उर्मिला का अडिग विश्वास : भक्ति की वह ज्योति जो काल को भी रोक दे

रामायण का यह प्रसंग केवल एक कथा नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और त्याग की पराकाष्ठा का जीवंत उदाहरण है।
जब लक्ष्मण मेघनाथ के शक्ति बाण से मूर्छित होकर रणभूमि में गिर पड़े, तब सम्पूर्ण वातावरण शोक में डूब गया। हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणगिरि पर्वत उठाकर आकाश मार्ग से लौट रहे थे। मार्ग में अयोध्या के समीप नंदीग्राम पड़ा, जहाँ भरत ने उन्हें राक्षस समझकर बाण चला दिया।

हनुमान जी भूमि पर गिरे, पर जैसे ही उन्होंने सम्पूर्ण घटना सुनाई, अयोध्या का वातावरण करुणा और वेदना से भर उठा। माता कौशल्या का हृदय व्याकुल हो उठा–उन्होंने संदेश भेजा कि “राम, लक्ष्मण के बिना अयोध्या में प्रवेश न करें।”
माता सुमित्रा का उत्तर और भी अद्भुत था—“यदि लक्ष्मण नहीं रहे, तो शत्रुघ्न को भेज दूंगी; मेरे पुत्र तो राम सेवा के लिए ही जन्मे हैं।”
यह मातृत्व का वह रूप था, जहाँ ममता से अधिक धर्म और कर्तव्य का स्थान था।
किन्तु जब हनुमान जी की दृष्टि उर्मिला पर पड़ी, तो वे आश्चर्यचकित रह गए।
न कोई व्याकुलता, न कोई अश्रु—केवल शांत, स्थिर और प्रसन्न मुखमंडल।
हनुमान जी ने पूछा—
“देवी! आपके पति के प्राण संकट में हैं, फिर भी आप इतनी निश्चिंत कैसे?”
उर्मिला का उत्तर केवल शब्द नहीं था, वह भक्ति का शिखर था—
उन्होंने कहा, “मेरा दीपक बुझ ही नहीं सकता। मेरे स्वामी तो प्रभु राम की गोद में हैं। जो योगेश्वर राम की शरण में हो, उसे काल भी स्पर्श नहीं कर सकता।
“लक्ष्मण के प्रत्येक श्वास में राम हैं, उनके रोम-रोम में राम हैं—तो शक्ति बाण उन्हें कैसे लगेगा? वह तो राम को ही लगा है। यह सब प्रभु की लीला है।”
यह सुनकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह निकली। उन्होंने अनुभव किया कि भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण है—जहाँ भय, शंका और मृत्यु का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है।

संदेश

रामराज्य केवल भगवान श्रीराम के राज्य का नाम नहीं था, वह लक्ष्मण, भरत जैसे भाइयों एवं प्रजा, सीता, उर्मिला और उन जैसी महान नारियों के त्याग, प्रेम और विश्वास की नींव पर खड़ा एक आदर्श था।
श्रीराम का जीवन हमें बताता है कि प्रेम, न्याय, त्याग और समर्पण से ही एक आदर्श समाज की स्थापना होती है। रामराज्य केवल एक शासन नहीं, बल्कि जीवन के उच्चतम मूल्यों का प्रतीक है।

इस परम पावन दिन का अधिकाधिक लाभ हम कैसे लें ?

देवताओं एवं अवतारों की जन्मतिथि पर उनका तत्त्व भूतल पर अधिक मात्रा में सक्रिय रहता है। श्रीरामनवमी के दिन रामतत्त्व अन्य दिनों की तुलना में १ सहस्र गुना सक्रिय रहता है । इसका लाभ लेने हेतु रामनवमी के दिन ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ यह नामजप अधिकाधिक करें। रामायण में ‘राम से बड़ा राम का नाम’ की कथा भी हम सबने सुनी है। सभी जानते हैं कि ‘श्रीराम’ शब्द लिखे पत्थर भी समुद्र पर तैर गए। उसी प्रकार श्रीराम का नामजप करने से हमारा जीवन भी इस भवसागर से निश्‍चित मुक्त होगा।

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परमब्रह्म डॉ जयंत आठवले जी ने यह भी आव्हान किया है कि* अभी के काल में बढ़ते अनाचार एवं विभिन्न माध्यम से हो रहे देवताओं का अनादर को देखते हुए, साथ ही “तीसरे विश्व युद्ध की बनती हुई स्थिति” में हमारी रक्षा हो, इसके लिए श्रद्धापूर्वक ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ नामजप करें।

साथ ही सभी जागरूक होकर धर्महानि रोकने का प्रयास करें! धर्महानि रोकना काल के अनुसार आवश्यक धर्मपालन है। इसके बिना देवता की उपासना परिपूर्ण नहीं हो सकती। श्रीराम के एक हाथ में धनुषबाण है तथा एक हाथ आशीर्वाद देनेवाला है। हम सदैव प्रार्थना करेंगे “हे धर्मपालक श्रीराम, मुझसे सदैव धर्माचरण करवा लीजिए तथा समाज में विभिन्न प्रकार से हो रहे धर्महानि को रोकने हेतु हमसे उचित कृति करवा लीजिये”।

हम सभी रामनवमी पर भगवान श्री राम से प्रेरणा लेकर, पूर्ण समर्पित होकर रामराज्य की स्थापना के लिए प्रयास कर पाएं, यही श्रीराम जी के चरणों में प्रार्थना करें।

सन्दर्भ : सनातन संस्था के विभिन्न जालस्थल

 

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