पटना: शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने आज प्रेस वार्ता में बताया कि 2005 में जनता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने कहा कि सुशासन का एक महत्वपूर्ण अंग शिक्षा रहा है।
वर्ष 2005 में राज्य का शिक्षा बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 70,000 करोड़ रुपये हो गया है। शिक्षा में अब विशेष रूप से गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो सके।
सात निश्चय-3 योजना के तहत उन्नत शिक्षा पर जोर दिया गया है, और उच्च शिक्षा को अलग विभाग का दर्जा दे दिया गया है।
2005 में राज्य में 1.5 लाख शिक्षक थे, जो अब और बढ़ गए हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 15 विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।
आने वाले समय में 15 से 20 जनवरी के बीच BPSC TRE-4 के लिए रोस्टर बिहार लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा।
बालिकाओं की शिक्षा को मजबूत करने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 300 से अधिक छात्राओं को AMU मॉडल पर मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जा रही है।
इसके अलावा, विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और संबंधित कर्मियों के लिए एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये कदम शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार को और मजबूत करेंगे।






















