जमुआ: जमुआ प्रखंड के पराखारो स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आ रही है। विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बच्चों को रोजाना घर से ही बोतल में पानी लाकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
विद्यालय भवन की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। भवन के कई हिस्से जर्जर अवस्था में हैं और छत के छज्जों से प्लास्टर के टुकड़े टूटकर गिरते देखे जा रहे हैं। ऐसे में कभी भी किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विद्यालय की सचिव ने बताया कि पेयजल की समस्या काफी दिनों से बनी हुई है। विद्यालय में पहले से लगा चापानल गंदा पानी देता है, जिस कारण बच्चों के पीने योग्य नहीं है। इसी वजह से सभी बच्चे घर से पानी लाने को मजबूर हैं। सचिव ने यह भी बताया कि इस समस्या को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को पहले ही लिखित रूप में अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति पर सचिव ने कहा कि विभाग द्वारा विकास मद में केवल 25 हजार रुपये की राशि दी जाती है, जिससे भवन की समुचित मरम्मत, विशेषकर टूटे हुए छज्जों की मरम्मत कराना संभव नहीं है।
बताया जा रहा है कि विद्यालय में लगभग 30 बच्चे नामांकित हैं। बच्चों ने भी बताया कि स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें रोजाना घर से ही पानी लाना पड़ता है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग कब तक इस समस्या पर ध्यान देगा और कब तक मासूम बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा।






















