निरसा: निरसा से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जहां एक तरफ 4 साल के मासूम को सियार ने काटकर चोटिल कर दिया , वहीं दूसरी तरफ इलाज के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरा में लापरवाही की हद पार कर दी गई।
निरसा प्रखंड के बैजना पंचायत में बुधवार दोपहर दर्दनाक हादसा हुआ। बैजना निवासी बबलू भुइया का 4 वर्षीय बेटा कृष्ण भुइया नदी में नहा रहा था, तभी अचानक एक सियार ने उस पर हमला कर दिया। बच्चे के चीखने पर परिजन दौड़े और कृष्ण को लेकर तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरा पहुंचे।
लेकिन यहां इलाज से पहले कागजों का खेल शुरू हो गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने पहले राशन कार्ड और आधार कार्ड मांगा। साफ कह दिया – “कागज नहीं लाओगे तो इलाज नहीं होगा।”
डेढ़ घंटे तक तड़पते बच्चे को लेकर मां-बाप गेट पर बैठे रहे। जब घर से राशन कार्ड मंगवाया गया और परिजनों ने हंगामा किया, तब जाकर इलाज शुरू हुआ।
हद तो तब हो गई जब इलाज शुरू करने के बाद भी अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं मिला। स्टाफ ने मासूम को धनबाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
बाइट: पीड़ित पिता
यहाँ सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब एक गरीब को इलाज के लिए 40 किलोमीटर दूर धनबाद सदर ही जाना पड़े, तो करोड़ों की लागत से बने इस सामुदायिक केंद्र का क्या औचित्य?
स्वास्थ्य मंत्री भले ही मंचों से बड़े-बड़े दावे करें, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में जरूरी दवाइयां तक नसीब नहीं।
इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने सरकार से मांग की है कि पंडरा जैसे सामुदायिक केंद्रों में एंटी-रेबीज, एंटी-वेनम जैसी जरूरी दवाइयां तुरंत उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी और कृष्ण की तरह तड़पना न पड़े।






















