निरसा: निरसा विधानसभा के मैथन रोड स्थित झिलिया नदी पर बने पुराने पुल को सोमवार की सुबह संवेदक (ठेकेदार) द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। नियमानुसार, किसी भी चालू पुल को तोड़ने से पहले आवागमन के लिए एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ संवेदक की भारी लापरवाही देखने को मिली है। सही तरीके से वैकल्पिक रास्ता तैयार किए बिना ही मुख्य पुल को तोड़ दिया गया, जिससे आम राहगीरों और वाहन चालकों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
संवेदक द्वारा आनन-फानन में जैसे-तैसे जो वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है, वह आवाजाही के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि यहाँ थोड़ी सी भी चूक किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है
इस अस्थायी मार्ग की स्थिति बेहद खतरनाक है। रास्ते का एक छोर काफी संकीर्ण (संकरा) है, जिससे वाहनों के गुजरने में दिक्कत हो रही है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इसी संकरे रास्ते के पास एक बिजली का पोल मौजूद है, जिस पर बिजली के खुले तार लटक रहे हैं। इससे करंट लगने और किसी अप्रिय घटना के घटने का खतरा हर समय मंडरा रहा है
बिना किसी पूर्व योजना और समुचित सुरक्षित मार्ग के निर्माण के इस तरह पुल को ध्वस्त कर देने से स्थानीय लोगों और रोज़ाना सफर करने वाले राहगीरों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और संवेदक आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया जाए, लटकते हुए बिजली के तारों को सुरक्षित किया जाए और जल्द से जल्द एक चौड़ा व सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए ताकि कोई बड़ी अनहोनी न हो।
मौके पर माले नेता नागेन्द्र कुमार एवं शिवलीबाडी पूरब पंचायत के मुखिया तनवीर आलम पहुंचे तो पाया कि लोग काफी परेशान है और ठेकेदार का कोई अता-पता नही है। दोनों ने ठेकेदार व पीडब्लूडी के जेई से बात की और समस्याओ से अवगत कराए।
उन्होंने जिला प्रशासन, पीडब्लूडी व ठेकेदार से मांग की है कि-तत्काल डायवर्शन रोड को व्यस्थित कराई जाए और डायवर्शन रोड के दोनो तरफ गाडियों को व्यस्थित तरीके से पार करवाने के लिए दो आदमी नियुक्त किए जाए। डायवर्शन रोड में लाइट का व्यवस्था की जाए।
कुमारधुबी, शिवलीबाडी, एग्यारकुंड तथा चिरकुण्डा क्षेत्र के लाखों की आबादी के पेयजल का मुख्य पाइप जो पुल के बगल से गया है, उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेवारी ली जाए।बरसात से पहले हर हाल में पुल बनाकर चालू कर दी जाए। नही तो झिलिया नदी के उफान में न डायवर्शन रोड रहेगा न पुल रहेगा और क्षेत्र के लोग परेशान हो जायेगें।






















