झरिया: झरिया कोयलांचल में भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं। सूरज आग उगल रहा है। धनबाद में पारा 39 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। हालत यह है कि लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो चुका है। वहीं झरिया क्षेत्र में हजारों लोग सूर्य की गर्मी के साथ धरती की आग के ऊपर रहने को विवश हैं। सर्वे होने के बावजूद, विस्थापितों को सुरक्षित आवास आवंटित नहीं किए गए हैं, जिससे वे जोखिम भरे क्षेत्रों में रहने को मजबूर हैं। जी हां हम बात कर रहे घनुवाडीह कुम्हार पट्टी की। आज भी करीब 35 घर भू-धंसान अग्नि प्रभावित और धधकती आग के ऊपर जहरीली गैस के रिसाव के बीच गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। एक तरफ सूर्य का तेज ताप तो दूसरी ओर धरती से निकलती आग।दोहरी गर्मी के बीच 180 परिवार यहां रहते हैं।आग के शोलों पर यहां जिंदगी कट रही है।गैस के कारण स्थानीय निवासियों में सांस लेने में तकलीफ हो रही है।उल्टी, चक्कर और घबराहट हो रही है।स्थानीय संजय कुमार महतो ने 2017 में सर्वे हुआ था। कुछ लोगों को बेलगढ़िया में विस्थापित किया गया है। ओर भी लोग न बचे हुए है।बताया कि भूमिगत आग के कारण घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं और जमीन धंसने का खतरा हमेशा बना रहता है। गैस के रिसाव और दुर्गंध के कारण लोगों का, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का, जीना दूभर हो गया है।घनुवाडीह मोहरीबांध,कुम्हार पट्टी के लोग वर्षों से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन और झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (JRDA) द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।यहाँ के लोग धधकती आग के ऊपर,गैसों के बीच और हर पल मौत के साए में जीने को विवश हैं।अगर किसी तरह का अप्रिय घटना घटती है बीसीसीएल प्रंबधन ओर जरेडा जिम्मेवार होगा।






















