रांची: झारखंड में पिछले कुछ सालों में हुई JPSC और JSSC की अलग-अलग परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CID जांच में नई बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, CID ने इन दावों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुख्य सचिव के ऑफिस के गोपनीय विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार की भूमिका जांच के लिए बहुत अहम मानी जा रही है। इन सूत्रों के मुताबिक, CID ने 11 अगस्त को धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया।
Highlights:
पूर्व मुख्य सचिव के कार्यकाल में हुई नियुक्ति
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार को पूर्व मुख्य सचिव पी.पी. शर्मा के कार्यकाल में कॉन्ट्रैक्ट पर कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर नियुक्त किया गया था। बताया जाता है कि उस समय धर्मेंद्र के पिता पूर्व मुख्य सचिव के यहां रसोइए का काम करते थे। इसके बाद, सचिवालय के प्रशासनिक गलियारों में धर्मेंद्र की पहुंच बढ़ती गई। एल. खियांगते के मुख्य सचिव बनने के बाद भी वह गोपनीय ऑफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करते रहे। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान अधिकारियों के बीच उनका नेटवर्क और प्रभाव बढ़ा।
परीक्षा एजेंसी TDPL से कमीशन मांगने का आरोप
CID जांच से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि धर्मेंद्र ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL से भारी कमीशन की मांग की थी। आरोप है कि उसने OMR शीट स्कैनिंग, एडमिट कार्ड जारी करने और प्रश्न पत्र छापने जैसे कामों के कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के बदले ₹20 से ₹25 लाख के कमीशन की मांग की थी।जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि धर्मेंद्र बड़ी रकम के बदले उम्मीदवारों को परीक्षा पास कराने का भरोसा दिलाता था। TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से मिली जानकारी और बयानों को इस मामले में अहम सुराग माना जा रहा है।
TDPL डायरेक्टर ने धर्मेंद्र पर गंभीर आरोप लगाए
TDPL के डायरेक्टर रामवीर सिंह के CID को दिए बयान के मुताबिक, धर्मेंद्र ने FRO और PCF परीक्षाओं के दौरान 10 से 12 खास उम्मीदवारों का चयन पक्का करने के लिए एजेंसी पर दबाव डाला था। रामवीर सिंह के अनुसार, जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो धर्मेंद्र ने कथित तौर पर परीक्षा का पेपर लीक करने की मांग की। डायरेक्टर ने पेपर लीक करने से इनकार करते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े सभी काम आयोग के नियमों के अनुसार ही किए जाएंगे। बयान में आगे कहा गया है कि इसके बाद धर्मेंद्र और ‘रवि’ नाम के एक सहयोगी ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। रामवीर सिंह ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र ने खुद को मुख्य सचिव के कार्यालय का एक प्रभावशाली कर्मचारी बताते हुए उन्हें झारखंड से बाहर ट्रांसफर करवाने और जेल भिजवाने की धमकी दी।
हीनू चौक पर हुए विवाद का ज़िक्र
अपने बयान में, रामवीर सिंह ने रांची के हीनू चौक पर शनि मंदिर के पास अपने और धर्मेंद्र के बीच हुए एक विवाद का भी ज़िक्र किया। उनके अनुसार, यह बहस सड़क पर हुई थी और इसकी वजह परीक्षा से जुड़ा कथित दबाव था। रामवीर सिंह ने यह भी बताया कि तत्कालीन JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते और परीक्षा की डिप्टी कंट्रोलर श्वेता गुप्ता को धर्मेंद्र की कथित गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और CID की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा (PT) के बारे में TDPL ने क्या कहा?
CID को दिए अपने बयान में रामवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि TDPL ने सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा (PT) आयोजित नहीं की थी। उनके अनुसार, उस परीक्षा की शुरुआती मेरिट लिस्ट एक अलग थर्ड-पार्टी एजेंसी ने तैयार की थी। रामवीर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दो सवाल हटा दिए गए थे। इसके बाद, TDPL ने एक संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की; नतीजतन, मूल सूची में शामिल 200 उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया, जबकि 200 नए उम्मीदवारों को मेरिट लिस्ट में शामिल किया गया। JPSC और JSSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अभी चल रही है। धर्मेंद्र कुमार की गिरफ्तारी और TDPL से जुड़े लोगों के बयानों के आधार पर, CID इस पूरे मामले में शामिल कथित नेटवर्क और अन्य संभावित भूमिकाओं की जांच कर रही है।






















