Janmashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में आधी रात के समय हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात 12 बजे लड्डू गोपाल के जन्म का विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भक्त उन्हें माखन-मिश्री और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाते हैं। कई स्थानों पर 56 भोग अर्पित करने और कान्हा को झूले में झुलाने की परंपरा भी है। पंडित शुक्ल के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर कुछ ऐसी वस्तुएं घर लाने की धार्मिक मान्यता है, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं ऐसी कौन-कौन सी चीजें हैं।
Highlights:
जन्माष्टमी पर घर लाएं बांसुरी
भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में बांसुरी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में कृष्ण की वेणु-ध्वनि और उससे प्रभावित होने वाले वृंदावन के जीव-जंतुओं एवं गोपियों का वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी पर बांसुरी खरीदकर उसे भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद इसे घर की पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखने की सलाह भी दी जाती है। धार्मिक मान्यता में इसे घर में सकारात्मकता और सुख-शांति से जोड़कर देखा जाता है।
मोरपंख और गाय-बछड़े की मूर्ति मानी जाती है शुभ
भगवान कृष्ण के श्रृंगार में मोरपंख का विशेष स्थान माना जाता है। कृष्ण के स्वरूप और उनकी लीलाओं से मोरपंख का गहरा धार्मिक संबंध है। इसलिए जन्माष्टमी के अवसर पर मोरपंख घर लाने और इसे पूजा स्थान पर रखने की परंपरा कई लोगों में देखने को मिलती है। इसी तरह भगवान कृष्ण के गोपाल स्वरूप के कारण गाय और बछड़े की मूर्ति को भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन ऐसी मूर्ति घर में रखने से परिवार में प्रेम और सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
फूलों की माला और पीले वस्त्र से करें कान्हा का श्रृंगार
भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में फूलों की माला का भी विशेष महत्व बताया गया है। जन्माष्टमी के दिन गुलाब, कमल या अन्य फूलों से बनी माला लाकर लड्डू गोपाल को अर्पित की जा सकती है। कृष्ण के स्वरूप में पीले वस्त्रों यानी पीतांबर का भी विशेष महत्व है। जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए पीले वस्त्र खरीदकर उन्हें धारण कराने की परंपरा है। भक्त इसे भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति के भाव से करते हैं।
जन्माष्टमी पर इन चीजों की भी कर सकते हैं खरीदारी
बांसुरी, मोरपंख, गाय-बछड़े की मूर्ति, फूलों की माला और पीले वस्त्रों के अलावा जन्माष्टमी पर कुछ अन्य पूजा सामग्री भी खरीदी जा सकती है। इनमें माखन-मिश्री, श्री यंत्र, पंचामृत की सामग्री, भगवान का सिंहासन और तुलसी का पौधा शामिल हैं। जन्माष्टमी के दिन इन वस्तुओं को खरीदने और भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करने की परंपरा धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। हालांकि, इनसे मिलने वाले लाभ व्यक्तिगत आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।
जन्माष्टमी का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना है। घर में पूजा के दौरान साफ-सफाई, भगवान का श्रृंगार, भोग और आरती के साथ कृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण किया जाता है। रात 12 बजे भगवान के जन्म के बाद भक्त उन्हें झूले में झुलाते हैं और प्रसाद वितरित करते हैं। इस दौरान परिवार के लोग एक साथ पूजा में शामिल होकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।






















