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Thursday, September 24, 2026

झारखंड के अधिकारी डॉ. सुदीप कुमार की पुस्तक ने Amazon India पर बनाया रिकॉर्ड, एक दिन में हासिल किया पहला स्थान

प्रकाशन के अगले ही दिन Amazon India पर नंबर वन बनी पुस्तक

झारखंड: झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग में हजारीबाग में पदस्थ झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारी एवं लेखक डॉ. सुदीप कुमार की पुस्तक ने प्रकाशन के महज एक दिन के भीतर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनकी पुस्तक द एग्जाम दैट कैनॉट लीक : मेरिट, ईमानदारी और डिजिटल युग के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का पुनर्निर्माण ने Amazon India पर ‘जनकार्य एवं नीति संबंधी ई-पुस्तकें’ श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है। पुस्तक का प्रकाशन 20 सितंबर 2026 को हुआ। इसके बाद Amazon पर पुस्तक के साथ ‘प्रथम बेस्टसेलर’ का उल्लेख दिखाई देने लगा। झारखंड में कार्यरत एक सरकारी अधिकारी की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय पर लिखी गई पुस्तक का इतनी जल्दी पाठकों का ध्यान आकर्षित करना राज्य के लिए भी उल्लेखनीय माना जा रहा है।

परीक्षा व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर

डॉ. सुदीप कुमार ने पुस्तक में प्रतियोगी परीक्षाओं की मौजूदा चुनौतियों और उनके संभावित समाधान पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किया है। पुस्तक का केंद्रीय विचार ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो सरल, सुरक्षित, पारदर्शी, वैज्ञानिक और अभ्यर्थी-केंद्रित हो। लेखक के अनुसार परीक्षा कठिन हो सकती है, लेकिन उसकी प्रक्रिया जटिल और अस्पष्ट नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक अभ्यर्थी को समान नियम, समान अवसर और निष्पक्ष परिस्थितियां मिलनी चाहिए। परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों के ज्ञान, समझ, तर्क क्षमता और योग्यता का सही आकलन होना चाहिए। पुस्तक में प्रश्न निर्माण से लेकर प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा संचालन, उत्तर-पत्रक, मूल्यांकन, परिणाम और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तक पूरी प्रक्रिया को एकीकृत व्यवस्था के रूप में देखने की बात कही गई है।

प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए अंतिम समय में पेपर तैयार करने का प्रस्ताव

पुस्तक की प्रमुख अवधारणाओं में ‘शून्य प्रश्नपत्र-लीक सिद्धांत’ शामिल है। लेखक का मानना है कि प्रश्नपत्र लीक होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसमें लीक की संभावना ही न्यूनतम हो।

इसके लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर विशेषीकृत परीक्षा एजेंसियां गठित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इन एजेंसियों के माध्यम से सुरक्षित प्रश्न बैंक तैयार करने, प्रश्नों का वैज्ञानिक तरीके से यादृच्छिक चयन करने और परीक्षा के अंतिम चरण में प्रश्नपत्र तैयार करने की परिकल्पना की गई है। प्रस्ताव के अनुसार परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र पहुंचने के बाद सुरक्षित प्रश्न बैंक से प्रश्नों का चयन किया जाए। इसके बाद दो दंडाधिकारियों की निगरानी में नियंत्रित वातावरण में प्रश्नपत्र का मुद्रण कर तुरंत अभ्यर्थियों को वितरित किया जाए। इससे प्रश्नपत्र की अनावश्यक आवाजाही और मानव हस्तक्षेप को कम किया जा सकता है।

उत्तर-पत्रकों की डिजिटल स्कैनिंग और सुरक्षित मूल्यांकन

डॉ. सुदीप कुमार ने परीक्षा समाप्त होने के बाद की प्रक्रिया को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना है। पुस्तक में उत्तर-पत्रकों की तत्काल स्कैनिंग और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग का सुझाव दिया गया है। स्कैनिंग के बाद डिजिटल रिकॉर्ड को कूटबद्ध कर अधिकृत परीक्षा एजेंसियों तक भेजने की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। इससे उत्तर-पत्रकों की भौतिक आवाजाही कम हो सकती है और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित एवं तेज बनाया जा सकता है। लेखक के अनुसार परीक्षा की विश्वसनीयता केवल प्रश्नपत्र की सुरक्षा से सुनिश्चित नहीं होती। प्रश्न निर्माण से लेकर परिणाम जारी होने तक प्रत्येक चरण में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

‘उपलब्धि कार्ड’ से असफलता की सोच बदलने की कोशिश

पुस्तक में प्रस्तुत सबसे अलग अवधारणाओं में ‘उपलब्धि कार्ड’ भी शामिल है। इसके तहत विद्यार्थियों को केवल सफल या असफल घोषित करने के बजाय परीक्षा में हासिल उनकी वास्तविक उपलब्धियों को पहचानने और प्रमाणित करने का विचार रखा गया है। लेखक ने श्वेत, पीला, हरा और गुलाबी—चार प्रकार के उपलब्धि कार्ड की परिकल्पना की है। प्रारंभिक स्तर पर बिना ऋणात्मक अंकन के 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को श्वेत उपलब्धि कार्ड देने का प्रस्ताव है। आगे परीक्षा के विभिन्न चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अन्य कार्ड दिए जाने की अवधारणा रखी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बनाए रखना है, जो किसी परीक्षा में चयनित नहीं हो पाते, लेकिन उनके भीतर पर्याप्त योग्यता और क्षमता होती है। उपलब्धि कार्ड के माध्यम से उनकी मेहनत और प्रदर्शन को औपचारिक पहचान देने का विचार प्रस्तुत किया गया है।

यह भी पढ़ें: Dhanbad Encounter: पुलिस और अपराधियों में मुठभेड़, एक घायल; दो गिरफ्तार

उपलब्धि कार्ड से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर जोड़ने का प्रस्ताव

लेखक ने उपलब्धि कार्ड को केवल परीक्षा प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रखा है। पुस्तक में सुझाव दिया गया है कि उपलब्धि कार्ड धारकों को उनकी योग्यता के अनुरूप सरकारी योजनाओं, निजी क्षेत्र, कौशल आधारित रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जा सकता है।

निजी क्षेत्र को भी इस प्रक्रिया में सहभागी बनाने की बात कही गई है, ताकि युवाओं को वर्षों तक केवल अगली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे रहने के बजाय अपनी प्रमाणित क्षमता के आधार पर रोजगार के अवसर मिल सकें। यह अवधारणा परीक्षा व्यवस्था को रोजगार, कौशल विकास और देश के जनसांख्यिकीय लाभांश से जोड़ने का प्रयास करती है।

नकल संस्कृति और परीक्षा सुधार पर भी चर्चा

डॉ. सुदीप कुमार ने प्रश्नपत्र लीक की समस्या को केवल तकनीकी सुरक्षा से जोड़कर नहीं देखा है। पुस्तक में विद्यालय स्तर से विकसित होने वाली नकल और अनुचित साधनों की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। लेखक के अनुसार परीक्षा सुधार के लिए तकनीकी व्यवस्था के साथ ईमानदार परीक्षा संस्कृति विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने यह विचार भी रखा है कि किसी वैध कारण से परीक्षा से वंचित रहने वाले अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा में एक बार छूट या नॉर्मलाइजेशन आधारित पुनर्परीक्षा जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

पुस्तक में परीक्षा की तैयारी के अंतहीन चक्र को कम करने और विद्यार्थियों को एक परीक्षा की उपलब्धि के आधार पर आगे के अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी सुझाव दिए गए हैं।

झारखंड से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची परीक्षा सुधार की सोच

डॉ. सुदीप कुमार की पुस्तक किसी एक परीक्षा या राज्य तक सीमित नहीं है। इसमें प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया गया है। प्रकाशन के एक दिन के भीतर Amazon India की संबंधित श्रेणी में पहला स्थान हासिल करना पुस्तक को मिली शुरुआती लोकप्रियता का संकेत है। साथ ही यह उपलब्धि झारखंड में कार्यरत एक अधिकारी के लेखन और परीक्षा सुधार से जुड़े विचारों को व्यापक मंच मिलने के रूप में भी देखी जा रही है। पुस्तक में तकनीक, पारदर्शिता, रोजगार, निजी क्षेत्र और अभ्यर्थी-केंद्रित व्यवस्था को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। लेखक की यह पहल प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार को लेकर चल रही चर्चाओं में एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

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