आदिवासी अस्मिता और पहचान के लिए पूरे राज्य में उठी एक स्वर में आवाज, केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड लागू करने की अपील
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्यभर में एक दिवसीय धरना देकर सरना धर्म कोड की मांग को फिर से मुखर किया। आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर यह आंदोलन अब पूरे राज्य में गति पकड़ चुका है।
Highlights:
राज्यभर में हुआ विरोध प्रदर्शन, धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर जुटा जनसैलाब लेके सरना धर्म कोड की मांग
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने मंगलवार को पूरे राज्य में एक दिवसीय धरना आयोजित किया, जिसमें सरना धर्म कोड की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया गया। बाघमारा प्रखंड अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार रवानी के नेतृत्व में एक जत्था तेतुलमारी शक्ति चौक से रणधीर वर्मा चौक तक निकला। इससे पहले शहीद शक्ति नाथ महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।
“आदिवासियों की अस्मिता का सवाल है सरना धर्म कोड” – जेएमएम
जेएमएम के केंद्रीय सदस्य बबलू महथा ने कहा कि यह आंदोलन आदिवासी समाज की बहुप्रतीक्षित मांग को लेकर है। सरना धर्म कोड लागू करने से आदिवासियों को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मिलेगी, जो वर्षों से उपेक्षित रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के हर जिले में धरना दिया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर जंतर मंतर तक भी आंदोलन किया जाएगा।
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“भाजपा नहीं चाहती सरना धर्म कोड लागू हो” – जेएमएम नेताओं का आरोप
बाघमारा प्रखंड अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार रवानी ने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन, पर्व और परंपराएं हिन्दू धर्म से अलग हैं। वे सहरुल और सोहराय जैसे पर्व मनाते हैं और उनकी अलग सभ्यता व संस्कृति है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह आदिवासियों की पहचान और अधिकार को दबाना चाहती है।
जमकर लगे नारे, सरना धर्म कोड की मांग और तेज
धरना स्थल पर “सरना धर्म कोड लागू करो”, “आदिवासियों की पहचान को मान्यता दो” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल एक धर्म कोड की मांग नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक अस्तित्व की लड़ाई है।





















