हजारीबाग:झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित बभनबै पहाड़ पर सोमवार सुबह अचानक हुए भू-स्खलन से पूरा इलाका दहशत में आ गया। सुबह करीब 7 बजे पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा, जिससे चारों ओर धूल का गुबार फैल गया। पहाड़ के गिरने की आवाज़ एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, और इसके मलबे से आसपास के पेड़-पौधे जमींदोज हो गए।
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पहाड़ का इतिहास और कारण
बताया जा रहा है कि इस पहाड़ी पर 30 साल पहले बड़े पैमाने पर पत्थर का खनन किया गया था, जब फॉरेस्ट एक्ट जैसे पर्यावरणीय कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं थे। खनन पदाधिकारी अजीत कुमार ने जानकारी दी कि उस समय की खनन गतिविधियों का कोई स्पष्ट रिकार्ड मौजूद नहीं है। वर्षों पहले की गई उत्खनन प्रक्रिया ने पहाड़ की प्राकृतिक संरचना को कमजोर कर दिया था, जिसका परिणाम अब भू-स्खलन के रूप में सामने आया है।
भू-स्खलन से बदला पहाड़ का स्वरूप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिछले दो दिनों से पहाड़ से छोटे-छोटे पत्थर गिरने की घटनाएं हो रही थीं, जिसे लोगों ने नज़रअंदाज़ कर दिया। सोमवार सुबह सबसे पहले 3-4 बड़े पत्थर गिरे, और फिर चंद मिनटों में पहाड़ का एक विशाल हिस्सा धंस गया। गिरा हुआ मलबा पास की तलहटी और खनन से बने तालाब में भर गया, जिससे क्षेत्र की हरियाली को भारी नुकसान हुआ है।
स्थानीय आबादी में दहशत
इस हादसे के बाद आसपास के गांवों और बस्तियों में डर का माहौल है। लोग आशंका जता रहे हैं कि पहाड़ का और हिस्सा भी अस्थिर हो सकता है। स्थानीय पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में और बड़े हादसे हो सकते हैं।





















