बिहार:बिहार के सीवान जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में हुई भारी लापरवाही ने 34 वर्षीय मिंता देवी को कागजों पर 124 साल की बुजुर्ग बना दिया। सीवान के दुरौंधा विधानसभा क्षेत्र के अरजानीपुर गांव की मिंता देवी ने पहली बार अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उनके आधार कार्ड में जन्मतिथि 15 जुलाई 1990 दर्ज है, लेकिन जब वोटर आईडी कार्ड मिला तो उसमें जन्मतिथि 15 जुलाई 1900 लिखी थी।
मिंता देवी और उनके परिवार का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान कोई भी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या चुनाव आयोग का कर्मचारी उनके घर नहीं आया। मिंता के ससुर तेजप्रताप सिंह का आरोप है कि पूरे गांव में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। उन्होंने इस गलती को तुरंत सुधारने की मांग की।
यह मामला विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। दिल्ली में संसद भवन के बाहर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मिंता देवी की तस्वीर और 124 साल की उम्र वाली टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी ने कहा, “यह सिर्फ गलती नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की लापरवाही का नमूना है।”
चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले SIR अभियान चलाकर मतदाता सूची में त्रुटियों को सुधारने और नए मतदाताओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा था। लेकिन मिंता देवी का मामला सामने आने के बाद प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। मिंता देवी और उनका परिवार चाहता है कि उनकी उम्र की गलती तुरंत सुधारी जाए, ताकि आगे किसी तरह की परेशानी न हो।






















