“सामाजिक समरसता और शक्ति की उपासना से ही राष्ट्र मजबूत होता है” – विजय घोष
धनबाद:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा विजयादशमी उत्सव के अवसर पर शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन धनबाद विभाग के विवेकानंद नगर में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं प्रांत सामाजिक सद्भाव संयोजक विजय घोष ने समाज में जाति-भेद, छुआछूत और विभाजनकारी ताकतों को चुनौती देते हुए सामाजिक समरसता को राष्ट्र की मजबूती का मूल आधार बताया।
Highlights:
मुख्य वक्तव्य में विजय घोष ने कहा:
“संघ में वर्षों से एक साथ काम करने वाले स्वयंसेवक एक-दूसरे की जाति नहीं जानते। यही सामाजिक समरसता भारत की परंपरा और संघ की आत्मा है।”
उन्होंने कहा कि:
- भारत की परंपरा विभाजन नहीं, समावेश की रही है।
- कुछ राष्ट्र-विरोधी ताकतें समाज को जाति-पाति में बांटना चाहती हैं, लेकिन भारत समाज एकजुट रहेगा।
- विजयादशमी शक्ति की उपासना का पर्व है – “शांति के लिए शक्ति जरूरी है”।
- हमारे देवी-देवताओं के हाथों में शस्त्र होते हैं, लेकिन हमने शस्त्रधारण की परंपरा त्याग दी, जिसका परिणाम समाज ने भुगता है।
शताब्दी वर्ष की शुरुआत:
विजय घोष ने घोषणा की कि संघ का शताब्दी वर्ष आगामी 2 अक्टूबर 2025 से आरंभ हो रहा है। इस अवसर पर संघ ने तय किया है कि:
- कोई बड़े भव्य कार्यक्रम नहीं होंगे,
- बल्कि संघ की जड़ों को और मजबूत किया जाएगा,
- तथा “पंच परिवर्तन” के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जाएगा।
पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख विषय:
- पर्यावरण संरक्षण
- कुटुंब प्रबोधन (परिवार को जागरूक करना)
- सामाजिक समरसता
- नागरिक कर्तव्य
- स्वदेशी एवं स्वावलंबन
प्रमुख उपस्थिति:
कार्यक्रम में संघ के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक मौजूद थे:
- डॉ. रामनारायण सिंह – नगर संघचालक
- पंकज सिंह – सह कार्यवाह, धनबाद विभाग
- संदीप जी – विभाग कुटुंब प्रबोधन
- पंकज कुमार – सामाजिक सद्भाव विभाग
- जैनेन्द्र जी – महानगर सह कार्यवाह
- जितेन्द्र जी – बौद्धिक प्रमुख
- एवं सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक व समाज के अन्य नागरिक






















