निरसा:झारखंड के धनबाद जिले के निरसा अनुमंडल अंतर्गत चिरकुंडा थाना क्षेत्र के डुमरीजोड़ जंगलों में गुरुवार को अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई हुई।
बीसीसीएल, सीआईएसएफ और चिरकुंडा पुलिस की संयुक्त टीम ने कोयला माफियाओं के अवैध उत्खनन स्थलों पर बुलडोज़र चलाकर खनन गतिविधियों को ध्वस्त कर दिया।
Highlights:
डुमरीजोड़ वही इलाका है जो 2021 में अवैध खनन के चलते चर्चाओं में आया था।
उस वक्त सैकड़ों लोगों के फँसने और घायल होने की खबरें पूरे कोयलांचल से लेकर दिल्ली तक पहुँची थीं।
इसके बाद इस क्षेत्र को रेड ज़ोन घोषित कर दिया गया था और खनन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।
फिर भी, पिछले कुछ महीनों से कोयला माफियाओं ने अवैध उत्खनन दोबारा शुरू कर दिया था।
एक विधवा महिला की हिम्मत की कहानी
स्थानीय ज़मीन रैयत बेबी टुडू, जो एक विधवा महिला हैं, को जब अवैध खनन की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसका विरोध करने का साहस दिखाया।
लेकिन माफियाओं ने धमकी दी —“यह खनन नहीं रुकेगा, हमारी पहुँच एसपी तक है, तुम चाहो तो कहीं भी शिकायत कर लो।”
बेबी टुडू ने न तो डर दिखाया, न पीछे हटीं।
उन्होंने थाना में आवेदन दिया, न्यायालय में गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
थाना प्रभारी ने भी कथित तौर पर कहा —“जब तक आला अधिकारियों का आदेश नहीं आएगा, मैं कुछ नहीं कर सकता।”
क्या आला अधिकारियों की मौन स्वीकृति थी?
थाने से मिली इस निराशाजनक प्रतिक्रिया के बाद भी बेबी टुडू ने हार नहीं मानी।
उन्होंने लगातार पत्राचार के ज़रिए जिला प्रशासन, बीसीसीएल अधिकारियों और सांसद प्रतिनिधियों तक अपनी आवाज़ पहुँचाई।
आख़िरकार उनकी जिद और साहस ने रंग दिखाया —
गुरुवार को प्रशासनिक टीम पहुँची और अवैध खनन स्थलों पर बुलडोज़र चलवा दिया।
अभियान का परिणाम
- अवैध उत्खनन स्थलों की पूरी भराई करवाई गई।
- डुमरीजोड़ के जंगलों में अब सन्नाटा है — जहां कभी माफियाओं का बोलबाला था।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने बेबी टुडू के साहस को सलाम करते हुए कहा —“जहाँ प्रशासन और पुलिस खामोश थी, वहाँ एक विधवा महिला ने न्याय की लड़ाई जीत ली।”






















