इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (IOA), जिसकी स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी, ने पिछले 65 वर्षों में निरंतर विकास करते हुए देश की सबसे बड़ी और प्रभावशाली चिकित्सकीय संस्थाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। IOA की सुदृढ़ शैक्षणिक परंपरा के अनुरूप, वर्तमान ऑर्थोपेडिक सम्मेलन में उच्च स्तरीय एवं संरचित वैज्ञानिक व्याख्यानों का आयोजन किया गया।
Highlights:
सम्मेलन में व्याख्यानों को उनकी शैक्षणिक महत्ता के आधार पर निम्न श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
ओरेशन (Oration) – 6
IOA एवं एपोनिमस लेक्चर – 6
गेस्ट लेक्चर
कॉन्फ़्रेंस लेक्चर
इनवाइटेड लेक्चर
मुक्त शोध पत्र प्रस्तुतियाँ
IOA के संविधान के अनुसार, प्रत्येक ओरेशन सत्र की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष द्वारा की जाती है, जबकि सचिव सह-अध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं। यह व्यवस्था इन व्याख्यानों की सर्वोच्च अकादमिक गरिमा को रेखांकित करती है।
पद्मभूषण बालुसंकरण ओरेशन
इस वर्ष प्रतिष्ठित पद्मभूषण बालुसंकरण ओरेशन से डॉ. डी. पी. भूषण को सम्मानित किया गया। यह ओरेशन 20 मिनट की निर्धारित अवधि का होता है तथा परंपरागत रूप से केवल बेसिक साइंसेज़ पर केंद्रित रहता है।
डॉ. भूषण ने “विटामिन D और उसकी वैश्विक कमी” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने एक गंभीर किंतु अक्सर उपेक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया।
प्रमुख वैज्ञानिक बिंदु
अपने ओरेशन में डॉ. भूषण ने स्पष्ट रूप से बताया कि केवल सूर्य प्रकाश के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में विटामिन D प्राप्त करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
• विटामिन D का निर्माण केवल UV-B किरणों से होता है, जो सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच ही प्रभावी रूप से उपलब्ध रहती हैं।
• कपड़े, तेल, क्रीम तथा SPF 8 से अधिक वाले सनस्क्रीन UV-B किरणों को अवरुद्ध कर देते हैं।
• काँच की खिड़की से होकर आने वाला सूर्य प्रकाश विटामिन D के निर्माण में सहायक नहीं होता।
• गहरे रंग की त्वचा वाले व्यक्ति, वृद्धजन तथा पुरानी बीमारियों से ग्रसित रोगियों को समान मात्रा में विटामिन D उत्पन्न करने के लिए लगभग चार गुना अधिक सूर्य प्रकाश की आवश्यकता होती है।
• प्रयोगशालाओं में सामान्यतः स्वीकृत 30 ng/mL से अधिक का विटामिन D स्तर केवल युवा एवं पूर्णतः स्वस्थ व्यक्तियों के लिए ही पर्याप्त माना जा सकता है।
• मांसपेशियों के स्वास्थ्य, वृद्धावस्था तथा सह-रोगों से पीड़ित रोगियों में 50–80 ng/mL का विटामिन D स्तर अधिक उपयुक्त एवं लाभकारी माना जाना चाहिए।
डॉ. भूषण का यह ओरेशन अपनी वैज्ञानिक सटीकता, स्पष्ट प्रस्तुति तथा ऑर्थोपेडिक चिकित्सा में इसकी प्रत्यक्ष






















