Jharkhand Doctors Demand, धनबाद: झारखंड के सरकारी एवं निजी चिकित्सकों, अस्पतालों, जूनियर डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और दंत चिकित्सकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 संगठनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, चिकित्सकों की सुरक्षा और लंबित मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में संगठनों की ओर से स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सरकारी डॉक्टरों के करियर में समयबद्ध प्रगति, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों में व्यावहारिक राहत तथा आयुष्मान भारत से जुड़े वैध लंबित दावों के भुगतान जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। संगठनों ने संवाद और समाधान के माध्यम से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है।
Highlights:
चिकित्सकों और अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड की ओर से चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा संस्थानों को उपलब्ध कानूनी संरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि मारपीट, धमकी, तोड़फोड़ या चिकित्सा सेवाओं में बाधा डालने की घटनाओं पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने, जांच करने और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की जरूरत है। संगठन ने अस्पतालों में व्यावहारिक सुरक्षा मानक लागू करने और त्वरित आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया है। इसका उद्देश्य मरीजों का उपचार बिना बाधा जारी रखना और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना है।

सरकारी चिकित्सकों के Dynamic ACP और भर्ती पर जोर
झारखंड हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (JHASA) की ओर से सरकारी चिकित्सकों के लिए समयबद्ध और पारदर्शी डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (Dynamic ACP/DACP) लागू करने की मांग की गई है। ज्ञापन में केंद्र और बिहार की तर्ज पर करियर प्रगति की व्यवस्था अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है। संगठन ने सामान्य चिकित्सक संवर्ग में मौजूदा 6+6+6+7 वर्ष की व्यवस्था के स्थान पर 4+5+4+7 वर्ष की सेवा अवधि के अनुरूप Dynamic ACP का लाभ देने की मांग की है। दंत चिकित्सकों के लिए भी चार Dynamic ACP और समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। इसके अलावा सरकारी सेवा में नियुक्ति के बाद विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले चिकित्सकों के समुचित समायोजन और विशेषज्ञ संवर्ग से संबंधित स्पष्ट नियमावली बनाने की मांग की गई है। स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति को प्राथमिकता देने और चिकित्सकों की भर्ती के लिए समयबद्ध भर्ती कैलेंडर निर्धारित करने का प्रस्ताव भी ज्ञापन में शामिल है।

Clinical Establishment Act में व्यावहारिक राहत की मांग
एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) और IMA HBI की ओर से क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (CEA) के अनुपालन को लेकर कुछ राहत देने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि अधिनियम लागू होने से पहले से संचालित अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को मौजूदा बुनियादी ढांचे को दोबारा बनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे संस्थानों के लिए उपयुक्त छूट या राहत देने का प्रस्ताव रखा गया है। संगठनों ने 50 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को अधिनियम के दायरे से बाहर रखने की मांग भी की है, जबकि मरीजों की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, जैव-चिकित्सकीय कचरा प्रबंधन और जनस्वास्थ्य से जुड़े आवश्यक मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया है। एकल चिकित्सक और दो चिकित्सकों द्वारा संचालित क्लीनिकों के लिए भी स्पष्ट छूट या सरल अनुपालन व्यवस्था की मांग की गई है। इसके साथ ही संस्थानों के आकार, जोखिम और सेवाओं की प्रकृति के अनुरूप नियमन करने, दोहराव वाले निरीक्षण कम करने तथा अनुपालन संबंधी नियमों को स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
आयुष्मान भारत के लंबित भुगतान और दावों के निपटारे की मांग
IMA HBI और AHPI ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) तथा HEM 2.0 से संबंधित वैध लंबित दावों के समयबद्ध निपटारे की मांग की है। ज्ञापन में प्री-ऑथराइजेशन और क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया गया है। संगठनों ने दावा खारिज करने या भुगतान में कटौती किए जाने की स्थिति में लिखित कारण उपलब्ध कराने और निष्पक्ष समीक्षा एवं अपील की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक लागत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पैकेज दरों की नियमित समीक्षा करने की बात कही गई है, ताकि आवश्यक चिकित्सा सेवाएं चिकित्सकीय और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनी रहें। सूचीबद्ध अस्पतालों के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से पहले उचित शिकायत निवारण प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर देने की मांग भी की गई है। संगठनों ने संयुक्त ज्ञापन के माध्यम से सरकार से चिकित्सकों की सुरक्षा, सेवा संबंधी लंबित मुद्दों और स्वास्थ्य संस्थानों के नियमन पर सकारात्मक तथा समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया है।






















