झारखंड शराब घोटाले में 55 करोड़ की डील का दावा
Jharkhand Liquor Scam: झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले की जांच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने रांची की विशेष अदालत के समक्ष पूर्व की उत्पाद नीति से जुड़ी जांच संबंधी जानकारी रखी है। एजेंसी ने सह-अभियुक्त अमित मित्तल के बयान का भी हवाला दिया है, जिसमें शराब नीति में कथित बदलाव और उससे जुड़े लेन-देन के बारे में जानकारी दिए जाने की बात कही गई है। ACB के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आया है कि तत्कालीन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने झारखंड की उत्पाद नीति में बदलाव के लिए कथित तौर पर करीब 55 करोड़ रुपये की डील की थी। इन दावों की जांच फिलहाल जारी है।
Highlights:
5 करोड़ रुपये देने का ACB ने लगाया आरोप
ACB की जांच के हवाले से बताया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी पर विनय कुमार चौबे को 5 करोड़ रुपये देने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह रकम झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) में सलाहकार की भूमिका हासिल करने से जुड़ी थी। झारखंड हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के एक आदेश में भी ACB की ओर से अदालत में रखे गए इन आरोपों का उल्लेख है। आदेश के मुताबिक, जांच एजेंसी ने अमित मित्तल समेत कई लोगों के बयानों के आधार पर जनवरी 2022 में चौबे को 5 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप रखा था। हालांकि, अरुणपति त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में इन आरोपों से इनकार किया था। अप्रैल 2026 में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने कथित 5 करोड़ रुपये के भुगतान से इनकार किया था।
उत्पाद नीति बदलने के लिए 40-50 करोड़ रुपये की रिश्वत का दावा
ACB की जांच के अनुसार, झारखंड में वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित उत्पाद नीति लागू करने के लिए कथित तौर पर बड़ी रकम का लेन-देन किया गया। एजेंसी ने जांच में 40 से 50 करोड़ रुपये तक की कथित रिश्वत दिए जाने का दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में सक्रिय शराब कारोबार से जुड़े कथित सिंडिकेट को झारखंड के शराब कारोबार में प्रवेश दिलाना था। ACB ने इस संबंध में अमित मित्तल और अन्य लोगों के बयानों को जांच का हिस्सा बनाया है। झारखंड हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी ACB की ओर से यह कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में इस्तेमाल किए गए कथित तौर-तरीकों को झारखंड में लागू किया गया और कुछ आरोपियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शराब कारोबार में कंपनियों और कमीशन की भी जांच
ACB ने अदालत को बताया है कि जांच के दौरान शराब आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों और कथित कमीशन व्यवस्था की भी जानकारी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, दीशिता वेंचर्स और ओम साईं बेवरेजेज को थोक शराब आपूर्ति का काम मिलने के बाद देशी शराब निर्माताओं से प्रति कार्टन कथित तौर पर 300 से 600 रुपये तक कमीशन लिया गया। जांच एजेंसी ने यह भी कहा है कि मैनपावर आपूर्ति से जुड़ी कंपनियों के कुछ लोगों ने नीति और कथित भुगतान को लेकर जानकारी दी है। मामले में अलग-अलग आरोपियों और गवाहों के बयान जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी ACB द्वारा कई लोगों के बयान पेश किए जाने और उनमें अरुणपति त्रिपाठी, विनय कुमार चौबे तथा अन्य आरोपियों की कथित भूमिका का उल्लेख किए जाने की जानकारी है।
यह भी पढ़ें: Dhanbad Cyber Crime: बैंक अधिकारी बनकर करता था ठगी, धनबाद में साइबर ठग राहुल दास गिरफ्तार
फर्जी बैंक गारंटी मामले से दर्ज हुई थी ACB की FIR
ACB ने 20 मई 2025 को ACB रांची थाना कांड संख्या 09/2025 के तहत FIR दर्ज की थी। मूल मामला JSBCL की शराब दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी जमा किए जाने से जुड़ा था। झारखंड हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, दो प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा कथित फर्जी बैंक गारंटी दिए जाने के बाद मामला सामने आया। ACB ने जांच में सरकारी खजाने को करीब 38 करोड़ रुपये के कथित नुकसान का भी उल्लेख किया है। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और शराब नीति में कथित बदलाव, कंपनियों को लाभ पहुंचाने तथा कथित भुगतान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाने लगी। मई 2026 तक ACB की जांच पूरी नहीं हुई थी और आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया था। फिलहाल मामले में ACB की जांच जारी है। अदालत में जांच एजेंसी की ओर से रखे गए आरोपों और बयानों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आरोपों की पुष्टि और संबंधित लोगों की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।






















