बालूमाथ (लातेहार): बालूमाथ थाना क्षेत्र के झाबर पंचायत अंतर्गत कोमर गांव के कुशी टोला पारनदी में बिजली करंट की चपेट में आने से एक जंगली हाथी की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मामले की जांच में जुट गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक ग्रामीण ने जंगली हाथियों से बचाव के लिए अपने घर के आसपास बाड़ लगाई थी। बताया जा रहा है कि इस बाड़ में बिजली का करंट प्रवाहित किया गया था। बुधवार सुबह इलाके में विचरण करते हुए एक जंगली हाथी इसकी चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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एक रात पहले हाथी ने घर और फसल को पहुंचाया था नुकसान
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात कुशी टोला पारनदी निवासी बिफा उरांव के घर पर एक जंगली हाथी पहुंच गया था। हाथी ने घर के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने के साथ अंदर रखा अनाज भी खा लिया। घटना के समय बिफा उरांव अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घर में मौजूद थे। हाथी के उत्पात की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य किसी तरह घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। बताया गया कि हाथी ने घर के समीप लगी मक्का की फसल को भी नुकसान पहुंचाया था। घटना के बाद परिवार और आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहा।
सुरक्षा के लिए लगाई गई थी बाड़
हाथियों के दोबारा घर के पास आने की आशंका को देखते हुए ग्रामीण ने कथित तौर पर अपने घर के तीन तरफ बाड़ लगा दी। बताया जा रहा है कि जंगली जानवरों को दूर रखने के उद्देश्य से उसमें बिजली का करंट प्रवाहित किया गया था। बुधवार सुबह एक जंगली हाथी घर के समीप पहुंचा और बाड़ की चपेट में आ गया। करंट लगने के कारण हाथी की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
हाथी की मौत के बाद इलाके में जुटी ग्रामीणों की भीड़
सुबह हाथी की मौत की जानकारी फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। मृत हाथी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू की। विभाग बिजली प्रवाहित बाड़ लगाए जाने और हाथी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
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हाथियों के विचरण वाला क्षेत्र है बालूमाथ
बालूमाथ प्रखंड के कई इलाके जंगली हाथियों के विचरण के लिए अनुकूल माने जाते हैं। क्षेत्र में समय-समय पर हाथियों के गांवों में पहुंचने और फसलों एवं मकानों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के उत्पात से बचाव और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है। उनका मानना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं होने के कारण कई बार लोग अपने स्तर पर बचाव के तरीके अपनाने को मजबूर हो जाते हैं। फिलहाल वन विभाग की जांच के बाद ही हाथी की मौत और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






















