Navratri 4th Day 2026: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि मां कूष्मांडा को प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने और विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Highlights:
मां कूष्मांडा को कौन-सा भोग लगाएं?
धार्मिक परंपराओं में मां कूष्मांडा को मालपुआ प्रिय माना जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन भक्त माता को मालपुआ अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा कुम्हड़े से बनी मिठाई, पेठा, ताजे फल और बताशे भी भोग के रूप में चढ़ाए जा सकते हैं। उपलब्ध होने पर केसर वाला पेठा भी प्रसाद के रूप में अर्पित किया जा सकता है। भोग तैयार करते समय स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार प्रसाद अर्पित किया जा सकता है।
मां कूष्मांडा को अर्पित करें लाल फूल
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा में लाल रंग के फूल, जैसे गुड़हल और गुलाब, अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा करते समय भक्तों को मन में श्रद्धा रखते हुए माता का ध्यान करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में शुद्धता और सात्विकता का विशेष महत्व है। भोग बनाते समय तामसिक खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में देवी पूजा के दौरान तुलसी के पत्तों का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिए अपने घर की पूजा-पद्धति के अनुसार नियमों का पालन करें।
नवरात्रि के चौथे दिन शाम का पूजा मुहूर्त
दिए गए मुहूर्त विवरण के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 53 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक बताया गया है। वहीं, सायंकालीन संध्या का समय शाम 5 बजकर 53 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक दिया गया है। पूजा का सटीक समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि कर लें।
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मां कूष्मांडा के पूजा मंत्र
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना के दौरान भक्त इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
1. देवी स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
2. मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
3. मां कूष्मांडा का बीज मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
मान्यता है कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की श्रद्धापूर्वक पूजा और मंत्र-जाप करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति तथा सकारात्मकता का अनुभव होता है। भक्तों को पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा, आस्था और पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए।






















