धनबाद : शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस बार रविवार को महालया के साथ आरंभ हो रहा है। मां दुर्गा के धरती पर आगमन की मान्यता से जुड़ा यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। सोमवार, 22 सितंबर को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ नवरात्र की विधिवत शुरुआत होगी और प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
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नवरात्र का यह पर्व 2 अक्टूबर, विजयादशमी के दिन मूर्ति विसर्जन के साथ संपन्न होगा।
महालया : पितृ तर्पण और देवी आगमन का दिन
महालया को सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण का दिन है और साथ ही यह माना जाता है कि इसी दिन मां दुर्गा कैलाश से धरती पर प्रस्थान करती हैं। रेडियो पर प्रसारित महालया की पारंपरिक कथाओं और गीतों को सुनने के लिए सुबह से ही श्रद्धालु उत्सुक रहते हैं।
कलश स्थापना : शुभ मुहूर्त
- कलश स्थापना का शुभ समय: सुबह 06:09 बजे से 08:06 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक): 11:49 बजे से 12:38 बजे
इस अवधि में पूजा स्थलों, घरों और मंदिरों में कलश स्थापित कर विधिवत घटस्थापना की जाएगी। इसके साथ ही दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड आदि का पाठ शुरू होगा।
मां दुर्गा के नौ स्वरूप और उनका संदेश
| दिन | देवी स्वरूप | विशेषता / संदेश |
|---|---|---|
| 1 | शैलपुत्री | आत्मसम्मान और आत्मबल |
| 2 | ब्रह्मचारिणी | तप, संयम और साधना |
| 3 | चन्द्रघण्टा | प्रसन्नता और साहस |
| 4 | कूष्माण्डा | सृजन और स्त्री का महत्व |
| 5 | स्कंदमाता | ज्ञान की अधिकारी स्त्री |
| 6 | कात्यायनी | बेटी का महत्व |
| 7 | कालरात्रि | स्त्री की अपार शक्ति |
| 8 | महागौरी | संयम और शुद्धता |
| 9 | सिद्धिदात्री | सिद्धियों की दात्री |
धनबाद में दुर्गा पूजा की धूम
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक दुर्गा पूजा की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। पूजन सामग्रियों की दुकानों पर भीड़ बढ़ रही है। मिट्टी के कलश, नारियल, चुनरी, धूप-अगरबत्ती, घी, सिंदूर, सुपारी, जौ, कपूर जैसी वस्तुओं की मांग तेज हो गई है।
व्रतधारियों के लिए कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना आदि के भी अच्छे खासे स्टॉक बाजारों में उपलब्ध हैं। दुकानदारों का कहना है कि भले ही महंगाई हो, लेकिन भक्त मां की पूजा में कोई कसर नहीं छोड़ते।





















