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Wednesday, September 9, 2026

Shardiya Navratri 2025: आज करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती…

नवरात्र के दूसरे मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन हैं। मां ब्रह्मचारिणी, वैराग्य, तपस्या और ज्ञान की देवी है। मां ब्रह्माचारमई देवी कठोर तपस्या और ब्रह्मचर्य का पालन करती हैं। ब्रह्माचारिणी मां के नाम का अर्थ दो शब्दों से मिलकर बना है पहले ब्रह्म यानी तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की तपस्या करने से व्यक्ति की सारी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही जीवन की तमाम कठिनाइयों से मुक्ति मिलती हैं। तो आइए जानते हैं नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, व्रत कथा, भोग, मंत्र और आरती।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप 

मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, संयम और ज्ञान की देवी हैं।

यह देवी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं।

उनके दाएं हाथ में जपमाला (अक्षयमाला) और बाएं हाथ में कमंडल होता है।

उनका स्वरूप अत्यंत शांत, गंभीर, सौम्य और शक्तिशाली है।

वह देवी ज्ञान, ध्यान और ब्रह्मचर्य की प्रतीक मानी जाती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि 

1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

3. मां को पीले वस्त्र, पीले फूल, और पीले फल अर्पित करें।

4. मां ब्रह्मचारिणी को पंचामृत स्नान कराएं।

5. घी का दीपक जलाएं और मिसरी का भोग लगाएं।

6. पीली मिठाइयों और दूध से बने पदार्थों का भोग अर्पित करें।

7. हवन में लौंग, बताशे और हवन सामग्री से आहुति दें।

8. आरती करें और “मां ब्रह्मचारिणी की जय” के जयकारे लगाएं।

9. पूजा के अंत में पान, सुपारी, और दक्षिणा अर्पित करें।

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग 

मिसरी — मुख्य भोग।

पीले फल और मिठाई — जैसे केले, बेसन के लड्डू।

पीले रंग का उपयोग मानसिक शांति और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र 

स्तुति मंत्र:दधाना करपद्माभ्याम् अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती 

जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।।
भक्त तेरे चरणों का पूजे।
सदा रहें तेरे ही सांचे।।

विशेष मान्यता 

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से सभी बाधाएं दूर होती हैं।

यह पूजा मानसिक शांति, संतुलन, ज्ञान, और वैराग्य के लिए अत्यंत फलदायी है।

जो भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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