दो घंटे में 1 अरब से अधिक की रिकवरी, न्याय प्रणाली में विश्वास की मिसाल बनी डालसा की पहल
धनबाद, 10 मई 2025 — साल 2025 की दूसरी नेशनल लोक अदालत में एक ऐतिहासिक निर्णय देखने को मिला। धनबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के माध्यम से एक सड़क दुर्घटना में पति को खो चुकी ब्रिजमणी शर्मा को ₹99 लाख रुपये का मुआवजा मौके पर चेक के माध्यम से प्रदान किया गया। चेक मिलने के बाद ब्रिजमणी भावुक हो गईं और कहा कि “डालसा ने मुझे एक नया जीवन दिया है।”
Highlights:
नेशनल लोक अदालत का हुआ भव्य शुभारंभ
इस नेशनल लोक अदालत का उद्घाटन रांची स्थित झालसा से ऑनलाइन किया गया, जिसमें न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद एवं धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा चेयरमैन वीरेंद्र कुमार तिवारी मौजूद रहे। तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि “लोक अदालत संविधान के सामाजिक, आर्थिक एवं सस्ता न्याय देने की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।”
दो लाख 40 हजार 702 विवादों का हुआ समाधान
डालसा के अवर न्यायाधीश सह सचिव मयंक तुषार टोपनो ने बताया कि अदालत के प्रारंभिक दो घंटे में ही 2,40,702 मामलों का निपटारा कर दिया गया, जिसमें 207,485 प्री-लिटिगेशन विवाद और 33,217 लंबित मुकदमे शामिल हैं। इन मामलों से कुल ₹1,09,37,14,556 (एक अरब नौ करोड़ से अधिक) की राशि की रिकवरी की गई।
दुर्घटना पीड़िता को न्याय, बच्चों को शिक्षा सहायता
ब्रिजमणी शर्मा के मामले में अधिवक्ता बी.के. सिन्हा ने जानकारी दी कि उनके पति राजेंद्र प्रसाद शर्मा, पीके राय मेमोरियल कॉलेज में प्रोफेसर थे। वर्ष 2019 में एक ऑटो की टक्कर से उनकी मौत हो गई थी। इस केस को डालसा द्वारा त्वरित न्याय प्रदान करते हुए मुआवजा दिलाया गया।
इसके अतिरिक्त:
- शुभम सिंह को ₹50 लाख का लोन रेस्टोरेंट व्यवसाय हेतु दिलवाया गया।
- बबीता देवी को ₹20 लाख का चेक मुर्गी पालन हेतु।
- मां इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ा ₹10 लाख लोन विवाद मौके पर सुलझाया गया।
- दो दिव्यांगों को ट्राईसाइकिल और दिव्यांग प्रमाणपत्र दिए गए।
- चार अनाथ बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत ₹4,000/माह की सहायता राशि प्रदान की गई।
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न्यायिक अधिकारियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों की अहम भूमिका
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख न्यायिक अधिकारी:
- प्रधान न्यायाधीश (कुटुंब न्यायालय) सुभाष
- जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्रा अवस्थी
- मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला
- अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पार्थ सारथी घोष
- अवर न्यायाधीश एंजेलीना जोन, राजीव कुमार सिंह आदि
अपर समाहर्ता विनोद कुमार और सीटी एसपी अजीत कुमार ने भी लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला।
अजीत कुमार ने कहा कि “लोक अदालत महीनों की कोर्ट प्रक्रिया और आर्थिक व्यय से मुक्ति दिलाती है।”






















