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धनबाद:धनबाद जिला के पूर्वी टुंडी प्रखंड में 13 सितम्बर से 19 सितम्बर तक मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना की सोशल ऑडिट प्रक्रिया चलाई गई। कार्यक्रम में ग्राम सभाओं से लेकर जन सुनवाई तक के आयोजन किए जाने थे। लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पूरी प्रक्रिया को “खाना पूर्ति” बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि न तो ग्राम सभा की कोई सूचना दी गई और न ही जन सुनवाई की जानकारी उन्हें मिली। इससे ग्रामीण जनता भी इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकी। कई पंचायतों में मनरेगा कार्यस्थलों पर बोर्ड तक नहीं लगे हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
लटानी पंचायत में JSLPS का बैनर, सोशल ऑडिट का नामो-निशान नहीं
सोशल ऑडिट के दौरान लटानी पंचायत में एक और बड़ा मामला सामने आया, जहां ऑडिट कार्यक्रम में मनरेगा के सोशल ऑडिट का बैनर लगाने के बजाय JSLPS (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) का बैनर लगा दिया गया। इससे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में और भी अधिक असंतोष फैल गया।
बागवानी में पेड़ नहीं, फिर भी हुआ भुगतान!
कुछ पंचायतों में चल रहे आम बागवानी योजनाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि जिन जगहों पर पेड़ लगाए ही नहीं गए, वहां भी भुगतान कर दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने इसे स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और अनियमितता का मामला बताया है।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार से की जांच की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर झारखंड सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली यह योजना पूर्वी टुंडी में पूरी तरह विफल हो गई है। जनता को न तो काम मिल रहा है और न ही पारदर्शी तरीके से योजनाएं लागू हो रही हैं।
सूत्रों की मानें तो सोशल ऑडिट की टीम “मैनेज करके” काम कर रही है, जिससे जमीनी सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या झारखंड सरकार और मनरेगा विभाग पूर्वी टुंडी के जनप्रतिनिधियों की इस आवाज को सुनेगा? और अगर सुनेगा तो क्या ठोस कार्रवाई होगी?






















