छपरा: 12 दिनों से लापता शिवम की हत्या के मामले को लेकर मंगलवार को परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने रेवा-छपरा एनएच-722 स्थित भेल्दी चौक पर शिवम के शव को रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने “शिवम को न्याय दो” और “गुनहगार को फांसी दो” जैसे नारे लगाए।
पटना के पीएमसीएच में पोस्टमार्टम के बाद सोमवार देर रात शव गांव पहुंचा था, लेकिन परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया। घटना को लेकर पूरे इलाके में भारी आक्रोश था। परिजनों का आरोप है कि 12 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस बच्चे को सकुशल बरामद नहीं कर सकी। पीड़ित परिवार बच्चे की तलाश में दर-दर भटकता रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस सहयोग नहीं किया। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते गंभीरता दिखाई जाती, तो बच्चा बच सकता था।
धरना-प्रदर्शन के कारण छपरा-रेवा मार्ग सहित अमनौर-डेरनी मुख्य पथ पूरी तरह जाम हो गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घंटों तक यातायात बाधित रहा और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सूचना मिलने पर भेल्दी, अमनौर और डेरनी थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। स्थिति संभालने के लिए अंचलाधिकारी अजय कुमार, मरहौरा एसडीपीओ नरेश पासवान और एसडीएम निधि राज भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर जाम हटवाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
इसी दौरान अमनौर पुलिस के पहुंचते ही कुछ ग्रामीण आक्रोशित हो गए और पुलिस वाहनों पर हमला कर दिया। अमनौर थाना के एक वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे बाजार में भगदड़ की स्थिति बन गई। इस घटना में दो चौकीदार—रोहित अभिषेक और एक होमगार्ड चंचल कुमार, साथ ही इंस्पेक्टर का चालक घायल हो गया। सभी का इलाज अमनौर पीएचसी में कराया गया। इसके अलावा अमनौर थाना की दो अन्य गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिवम के अपहरण और हत्या के मामले में अमनौर पुलिस की गंभीर लापरवाही के कारण समय रहते कार्रवाई नहीं हो सकी। भीड़ का कहना था कि जब तक एसएसपी स्वयं मौके पर आकर आश्वासन नहीं देंगे, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर बीएसएपी और बीएमपी की टीमें भी तैनात की गईं।
दोपहर करीब दो बजे ग्रामीण एसपी संजय कुमार दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया तथा कहा कि अपराधी जहां भी होंगे, उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीण शांत हुए और सड़क जाम हटाया गया।
गौरतलब है कि शिवम का अपहरण 31 दिसंबर को किया गया था, जबकि 11 जनवरी को उसका शव बरामद हुआ। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में आक्रोश व्याप्त है। परिजन दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कठोर सजा की मांग कर रहे हैं।
शिवम के पिता राजन गुप्ता ने रोते-बिलखते कहा, “बच्चे के लिए किस-किसके दरवाजे नहीं गए। जो जैसा बोला, वैसा किया—बस मेरा कलेजे का टुकड़ा मिल जाए। कोई मदद नहीं मिली। मैं गरीब हूं, इसलिए कोई सुनवाई नहीं हुई। लाश मिलने के बाद सब लोग आ गए। अब तो मेरा सबकुछ खत्म हो गया।”






















