जामताड़ा:जामताड़ा जिले के सालकुंडा गाँव में पर्यूषण महापर्व के पांचवें दिन भगवान महावीर के जन्म वाचन का आयोजन बड़े श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ किया गया। 20 अगस्त से शुरू हुए इस महापर्व के तहत रविवार को गाँव के प्राचीन जैन मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज से पूरा माहौल आध्यात्मिक हो उठा। महिलाओं, बच्चों और युवाओं ने एक साथ मिलकर इस आयोजन को भव्य रूप दिया।
गाँव के वरिष्ठ नागरिक राजेंद्र सराक ने बताया कि भगवान महावीर की अमर वाणी “जियो और जीने दो” आज भी समाज को शांति, सद्भाव और अहिंसा का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जन्म हमारे ही राज्य के कुंडलग्राम में हुआ था, जो अब बिहार में है, यह हमारे लिए गर्व की बात है कि उन्होंने इस धरती पर विचरण किया।
सालकुंडा का जैन मंदिर अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन आज भी सरकारी मदद से वंचित है। मंदिर तक जाने वाली सड़क जर्जर स्थिति में है और पुलिया भी टूटी हुई है, जिससे ग्रामीणों ने इस अवसर पर प्रशासन से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग भी की।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ गाँव के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, महिलाओं ने भजन गाकर वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया और शाम को भजन संध्या का आयोजन किया गया। पूजा में बालिका मंडल के साथ वरुण माजी, तपन माजी, नंदलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में गाँव के लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सुरक्षित रखेंगे और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी गरिमा को पहुँचाएंगे।






















