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गिरिडीह:झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी कौशल विकास योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देने का जिम्मा निजी एजेंसियों को दिया गया है। लेकिन गिरिडीह जिले में यह योजना फर्जीवाड़े का अड्डा बन गई है।
जानकारी के अनुसार, एक्सल डाटा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (EDS) नामक कंपनी को झारखंड के 24 जिलों में टेंडर मिला है। इस कंपनी पर सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लगाने का आरोप लग रहा है।
पीरटांड़ प्रखंड का मामला
पीरटांड़ प्रखंड मुख्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर कंपनी का प्रशिक्षण केंद्र (कौशल विकास केंद्र) चलाया जा रहा है।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस केंद्र में 240 लाभुकों को प्रशिक्षित कर स्वावलंबी बनाना था।
लेकिन हकीकत यह है कि केवल 30 लाभुक ही वास्तविक रूप से पंजीकृत हैं, जबकि रिकॉर्ड में पूरे 240 लाभुकों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
ऑनलाइन ऐप से बनता है फर्जी अटेंडेंस
स्रोतों के अनुसार, कंपनी ने ऐसा ऐप तैयार किया है, जिससे लाभुकों की ऑनलाइन उपस्थिति (Attendance) कहीं से भी बनाई जा सकती है — यानी लाभुक सेंटर में आए बिना भी “हाजिर” दिखा दिए जाते हैं।
इस तरह हर माह बड़ी रकम सरकार से निकाल ली जाती है।
प्रति लाभुक ₹30,000 का भुगतान
सरकार द्वारा एक लाभुक को प्रशिक्षित करने के लिए ₹30,000 प्रति व्यक्ति की दर से भुगतान किया जाता है।
यानी सिर्फ पीरटांड़ केंद्र में ही कागज़ों पर 240 लाभुक दिखाकर लाखों रुपये की हेराफेरी की जा रही है।
केंद्र में नहीं हैं कोई प्रशिक्षण मशीन या उपकरण
जांच में यह भी पाया गया है कि केंद्र में प्रशिक्षण के लिए जरूरी मशीनें, उपकरण और सामग्री बिल्कुल नहीं हैं, जबकि गाइडलाइन के अनुसार प्रशिक्षक, लैब और ट्रेनिंग किट अनिवार्य हैं।
अधिकारियों को भनक तक नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा कई महीनों से चल रहा है, लेकिन जिले के वरीय अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
लोगों ने मांग की है कि सरकार इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराए और दोषी कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।





















