जामताड़ा:जामताड़ा में नाला प्रखंड के नातूनडीह मैदान में विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन ऐतिहासिक रूप से भव्य और जोशपूर्ण रहा। सूर्योदय के साथ ही गांव-गांव से लोगों का कारवां पारंपरिक परिधान,नगाड़ा, मांदर और ढोल की थाप के साथ कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ा। दोपहर तक मैदान में मानो जनसागर उमड़ आया।
देर शाम मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मंच से गरजते हुए कहा
झारखंड की पहचान यहां के मेहनतकश और स्वाभिमानी आदिवासी हैं। वे किसी से पिछड़े नहीं, लेकिन असली खतरा बांग्लादेशी घुसपैठियों से है। संथाल की बदलती डेमोग्राफी को रोकना होगा, ये लोग धीरे-धीरे हमारी जमीन, हमारी संस्कृति और हमारी शांति पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर समय रहते इन्हें रोका नहीं गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसकी कीमत चुकाएंगी।”चंपाई सोरेन ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ नाच-गान का दिन नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, संसाधनों और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेने का दिन है। इस दौरान उन्होंने सभी पूर्वज पुरुषों को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान और संघर्ष से ही आज हमारी पहचान कायम है।
पूरे कार्यक्रम में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक झलकियां देखने को मिलीं — पारंपरिक नृत्य, गीत, झांकी और वीर गाथाओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भीषण गर्मी के बावजूद मैदान में जोश चरम पर था और “सिद्धू-कान्हू अमर रहें” के नारे गूंजते रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और यह संकल्प लिया कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा हर परिस्थिति में की जाएगी।





















