Nalanda Damaged Bridge: नालंदा और शेखपुरा जिले की बड़ी आबादी के सामने इन दिनों आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बिहारशरीफ-कतरीसराय मुख्य मार्ग पर दरियापुर के समीप सकरी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी की तलहटी में बनाया गया अस्थायी डायवर्सन पूरी तरह जलमग्न हो गया है। डायवर्सन डूबने के बाद दर्जनों गांवों का बिहारशरीफ जिला मुख्यालय से सीधा सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है। इससे स्थानीय लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
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जर्जर पुल की सुरक्षा दीवार तोड़कर लोग कर रहे आवाजाही
स्थिति की गंभीरता तब और बढ़ गई जब आवागमन का आसान विकल्प नहीं मिलने पर स्थानीय लोगों ने प्रतिबंधित और जर्जर पुल पर बनी सुरक्षा दीवार का एक हिस्सा तोड़ दिया। इसके बाद लोग जान जोखिम में डालकर पुल से आवाजाही कर रहे हैं। दिनभर बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन और पैदल यात्री कमजोर पुल से गुजर रहे हैं। सकरी नदी के तेज बहाव और पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए किसी भी समय हादसे की आशंका बनी हुई है।

करीब तीन महीने पहले पुल को किया गया था खतरनाक घोषित
बताया जाता है कि सकरी नदी पर बना मुख्य पुल करीब एक दशक पहले तैयार हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, रखरखाव की कमी और पिलरों के आसपास कथित अवैध बालू खनन के कारण पुल की नींव कमजोर होने की स्थिति बनी। करीब दो वर्ष पहले आई बाढ़ के बाद पुल के पिलरों में धंसाव की बात सामने आई थी। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लगभग तीन महीने पहले पुल को खतरनाक घोषित कर वाहनों की आवाजाही बंद करा दी थी। पुल के दोनों छोर पर ईंट की सुरक्षा दीवार बनवाई गई थी। आवागमन जारी रखने के लिए नदी की तलहटी में अस्थायी कच्चा डायवर्सन बनाया गया था, लेकिन बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव में यह डायवर्सन भी डूब गया।

12 किलोमीटर का सफर अब 40 किलोमीटर तक पहुंचा
डायवर्सन डूबने से नालंदा के मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा शेखपुरा और बरबीघा के पश्चिमी इलाकों के लोगों को भी आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले बिहारशरीफ पहुंचने के लिए करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। अब गिरियक-पावापुरी मार्ग से करीब 35 से 40 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं अस्थावां के रास्ते भी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों, विद्यार्थियों, दैनिक मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है।

तीन महीने बाद भी स्थायी समाधान नहीं, ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि पुल को बंद किए करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। डायवर्सन डूबने के बाद लोगों के सामने आवागमन का संकट और गहरा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मजबूरी में पुल की सुरक्षा दीवार तोड़कर जोखिम भरी आवाजाही शुरू की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द सुरक्षित और स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है।
प्रशासन ने कहा- स्थिति पर रखी जा रही है नजर
मामले को लेकर बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी किसलय श्रीवास्तव ने बताया कि क्षेत्र की नदियों के बढ़ते जलस्तर और जलप्रवाह पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जर्जर पुल पर आवाजाही रोकने और डायवर्सन को बहाल कराने के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डालकर हो रही इस आवाजाही का सुरक्षित और स्थायी समाधान कब तक किया जाएगा।






















