रांची/नई दिल्ली: झारखंड के बहुचर्चित भूमि घोटाले (Land Scam) मामले में रांची के पूर्व उपायुक्त और वरिष्ठ IAS अधिकारी छवि रंजन को 28 महीने की जेल के बाद देश की सर्वोच्च अदालत से जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए यह माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, और ट्रायल में देरी के चलते जमानत देना न्यायोचित है।
Highlights:
2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए छवि रंजन पर रांची में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और कागजात में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है।
ईडी का आरोप था कि रांची के तत्कालीन उपायुक्त रहते हुए छवि रंजन ने कुछ रियल एस्टेट समूहों को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध भूमि स्वीकृतियां जारी कीं।
इस केस को झारखंड का सबसे बड़ा भूमि घोटाला माना जाता है, जिसमें कई रियल एस्टेट कारोबारी, दलाल और सरकारी कर्मचारी आरोपी बनाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश – जमानत के मुख्य बिंदु:
- जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
- 31 में से केवल 5 गवाहों की गवाही अब तक हो सकी है — ट्रायल लंबा खिंच सकता है।
- छवि रंजन 28 महीने से हिरासत में हैं, जिसका ध्यान अदालत ने विशेष रूप से रखा।
- कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, और न ही गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका जताई गई।
- सभी सह-आरोपित पहले ही जमानत पर रिहा किए जा चुके हैं।
- याचिकाकर्ता को झारखंड राज्य छोड़ने की अनुमति नहीं होगी, ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
- आरोपी को हर सुनवाई पर उपस्थित रहना होगा और लंबित कार्यवाही में सहयोग करना होगा।
पारिवारिक प्रतिक्रिया:
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद छवि रंजन की पत्नी और बच्चों ने राहत की सांस ली है। परिवार ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और भरोसा जताया कि न्याय मिलेगा।
ईडी की प्रतिक्रिया:
प्रवर्तन निदेशालय ने संकेत दिया है कि वह आगे की सुनवाई में मजबूत साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखेगा और ट्रायल में पूरी सक्रियता से भाग लेगा।





















