रांची(RANCHI):झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संस्कार और संस्कृति, किसी भी पद या प्रतिष्ठा से ऊपर होते हैं। अपने पिता और झारखंड आंदोलन के शिल्पकार दिशोम गुरु शिबू सोरेन के दशकर्म संस्कार के अवसर पर उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाज़ों का पूरी श्रद्धा से पालन करते हुए सर मुंडन कराया।
राजकीय व्यस्तताओं और मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियों के बीच हेमंत सोरेन ने जिस सादगी और भावनात्मक जुड़ाव के साथ पुत्र धर्म निभाया, उसने समाज के सामने एक प्रेरणास्पद उदाहरण प्रस्तुत किया।
परंपरा और संस्कृति के प्रति आस्था
मुख्यमंत्री ने यह संदेश दिया कि व्यक्ति की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों से बनती है। उन्होंने यह भी दिखाया कि आधुनिक राजनीति के बीच भी पारिवारिक मूल्य और सामाजिक परंपराएं न केवल जीवित हैं, बल्कि सम्मानित भी हो रही हैं।
समाज के लिए आदर्श
मुख्यमंत्री का यह सादगीपूर्ण रूप उन लोगों के लिए भी एक संदेश है, जो अक्सर सामाजिक मूल्यों को व्यस्तताओं या आधुनिकता के नाम पर नजरअंदाज़ कर देते हैं। हेमंत सोरेन ने एक आदर्श पुत्र और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि दोनों की भूमिका को बखूबी निभाया है।






















