Jharkhand EV Charging Stations, रांची: झारखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग की सुविधा बेहतर बनाने के लिए करीब 1000 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की तैयारी है। यह पहल झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (जेरेडा) प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत कर रही है। प्रस्तावित योजना के अंतर्गत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे। इनके संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनियों या संचालकों के पास होगी, जबकि जेरेडा इस प्रक्रिया में सहायता करेगा। इस योजना से इलेक्ट्रिक कार, दोपहिया और तिपहिया वाहन चालकों को चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, चार्जिंग स्टेशन कहां-कहां स्थापित होंगे और निर्माण कब शुरू होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
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झारखंड में करीब 1000 नए EV चार्जिंग स्टेशन लगाने की तैयारी
केंद्र सरकार की ओर से 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, झारखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान 353 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए थे। इनमें 129 फास्ट चार्जर और 224 स्लो चार्जर शामिल थे। अब करीब 1000 नए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रस्तावित योजना से राज्य में ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार हो सकता है। इससे शहरों के साथ-साथ अन्य प्रमुख मार्गों पर भी चार्जिंग की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण कम करने में मदद करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
EV चार्जिंग स्टेशन के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देशभर में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों तथा केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की ओर से चार्जिंग स्टेशन लगाने के प्रस्ताव दिए जा सकते हैं। योजना में स्थान और चार्जिंग स्टेशन की श्रेणी के आधार पर चार्जिंग उपकरणों तथा बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए सहायता या सब्सिडी का प्रावधान है। झारखंड में प्रस्तावित स्टेशनों के लिए सहायता की शर्तें और स्थानों का चयन संबंधित दिशा-निर्देशों तथा स्वीकृत प्रस्तावों पर निर्भर करेगा।
PPP मॉडल पर बनेंगे और संचालित होंगे स्टेशन
प्रस्तावित योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे। इसमें निजी कंपनियां या संचालक स्टेशन लगाने और उनका संचालन करने में भूमिका निभाएंगे। जेरेडा योजना के क्रियान्वयन में सहायता करेगा। इस मॉडल से चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने, बिजली कनेक्शन और उपकरणों की व्यवस्था करने तथा उनके रखरखाव में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ सकती है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक प्रगति और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाएं स्टेशन के स्थान, क्षमता और संचालन शुरू होने पर निर्भर करेंगी।
इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को क्या होंगे फायदे?
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता बढ़ने से वाहन चालकों की चार्जिंग को लेकर चिंता कम हो सकती है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ने की संभावना है।
प्रदूषण कम करने में मदद: पेट्रोल और डीजल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने से परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है। इसका लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बिजली का उत्पादन किस तरह के ऊर्जा स्रोतों से हो रहा है।
निवेश और रोजगार के अवसर: चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने, उनके संचालन और रखरखाव के लिए तकनीकी कर्मचारियों तथा अन्य सेवा प्रदाताओं की जरूरत हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
लंबी दूरी की यात्रा होगी आसान: यदि प्रमुख राजमार्गों और शहरों को जोड़ने वाले मार्गों पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाते हैं, तो इलेक्ट्रिक वाहनों से लंबी दूरी की यात्रा करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
झारखंड में 90 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 90 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 56 से 60 प्रतिशत बताई गई है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत, जबकि इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी लगभग पांच प्रतिशत तक बताई गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार महत्वपूर्ण हो सकता है। करीब 1000 नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना लागू होने पर राज्य में ईवी चालकों को अतिरिक्त सुविधाएं मिलने की संभावना है। अब योजना के क्रियान्वयन, स्थानों के चयन और निर्माण की समय-सीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।






















