देवरी(JHARKHAND):देवरी प्रखंड अंतर्गत देवरी झामुमो कार्यालय में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) कार्यकर्ताओं ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्मदिवस भव्य और भावनात्मक माहौल में मनाया। कार्यक्रम का आयोजन झामुमो प्रखंड अध्यक्ष मुजाहिद अंसारी की अगुवाई में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने भागीदारी निभाई।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक केदार हाजरा उपस्थित रहे। सभी कार्यकर्ताओं ने बारी-बारी से दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने नम आंखों से उनका आशीर्वाद स्मरण किया और उनके दिखाए मार्ग—आदिवासी पहचान तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा—पर चलने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन हुआ। झारखंड आंदोलन की शुरुआत भले ही जयपाल सिंह मुंडा ने की हो, लेकिन उसे मंज़िल तक पहुंचाने में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की भूमिका ऐतिहासिक रही।
शिबू सोरेन की राजनीति का मूल आधार आदिवासी अस्मिता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा रहा। उन्होंने सरहुल जैसे पारंपरिक त्योहारों को भी आंदोलन का मंच बनाया, खदान मजदूरों को संगठित किया और कॉरपोरेट व खनन कंपनियों के खिलाफ संघर्ष किया। उनकी पहल पर पेसा कानून (PESA) लागू हुआ, जिसने ग्राम सभाओं को जमीन से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार दिया।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उसी जमीनी राजनीति की बुनियाद पर आगे बढ़ रहे हैं और “जल, जंगल, जमीन” का नारा आज भी पूरे झारखंड में गूंज रहा है। झारखंड में झामुमो की लगातार सफलता के बाद अन्य राज्यों के आदिवासी समाज में भी इस दल को लेकर उत्सुकता और उम्मीद बढ़ी है।






















