राँची: भूमि, अधिकार और कानून की दुनिया कभी कभी बहुत जटिल लगती है। शब्दों की सही समझ के बिना राजस्व या काश्तकारी कानून में गलती महंगी पड़ सकती है। रांची में एक ऐसे ही प्रयास का ऐतिहासिक दिन रहा, जब झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने भू-राजस्व की दुनिया में ‘नई रोशनी’ लॉन्च किया। उन्होंने “ग्लोसरी ऑफ़ लैंड रेवेन्यू टर्म्स” पुस्तक का विमोचन किया। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव चंद्रशेखर, रांची विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. आई. के. चौधरी और प्रकाशक राजेंद्र कुमार आर्य भी उपस्थित थे।
भू-राजस्व के छात्रों और अधिकारियों के लिए वरदान
कई दशकों से भू-राजस्व और काश्तकारी कानून में शब्दों की सही व्याख्या की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। पहले इस क्षेत्र में 1940 में प्रकाशित ‘न्यायिक और भू-राजस्व शब्दावली’ ही प्रामाणिक मानी जाती थी। लेकिन आधुनिक काश्तकारी कानूनों, भूमि सर्वेक्षण विधियों और क्षेत्रीय शब्दों के लिए नई व्याख्याओं की जरूरत थी। यह पुस्तक न केवल शब्दों के अर्थ देती है, बल्कि संबंधित अधिनियम, प्राधिकरण और न्यायालयों की व्याख्याओं का संदर्भ भी प्रस्तुत करती है। इससे छात्रों, राजस्व अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और विधिवेत्ताओं के लिए जटिल मामलों को समझना और निर्णय लेना आसान हो जाएगा।
लेखक डॉ. सुनील कुमार सिंह… अनुभव और ज्ञान का संगम
डॉ. सुनील कुमार सिंह ने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर किया और स्वर्ण पदक प्राप्त किया। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने पीएच.डी. पूरी की। उनकी पहली प्रकाशित कृति “प्राचीन भारत में भूमि का स्वामित्व” थी।
इसके अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं, जैसे:
“झारखंड लैंड मैन्युअल”
“भू-राजस्व परिपत्रों का संग्रह”
“झारखंड की विकास यात्रा”
“संताल परगना का इतिहास”
उनकी वर्तमान पुस्तक 412 पृष्ठों की है और कीमत ₹1000/- है।
नई किताब – आधुनिक भू-राजस्व के लिए मार्गदर्शक
यह पुस्तक केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि राजस्व प्रशासन, न्यायिक निर्णय और भूमि विवादों से जुड़े पेशेवरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। यह आधुनिक भू-राजस्व शब्दावली और काश्तकारी कानून को समझने का एक प्रामाणिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। भूमि और अधिकारों की सही समझ समाज में न्याय और पारदर्शिता लाने में मदद करती है। रांची में आज लॉन्च हुई यह पुस्तक निश्चित रूप से भू-राजस्व और भूमि कानून के क्षेत्र में एक नई दिशा और रोशनी लेकर आए





















