आज देशभर में भगवान परशुराम की जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, शस्त्र और शास्त्र दोनों के महान ज्ञाता थे।
इस वर्ष यह पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जा रहा है और खास बात यह है कि इसी दिन अक्षय तृतीया का पावन संयोग भी बना है, जो इसे और अधिक शुभ बना देता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। इस दौरान भक्त व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान परशुराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।
इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करते हैं और घर के मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करते हैं। दीप जलाकर अक्षत, फूल और प्रसाद अर्पित किया जाता है।
भक्त “ॐ जमदग्नये विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात्” मंत्र का जप करते हैं और यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं।
पूजा के अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजा करने से साहस, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।






















