सारण में गंडक की बाढ़ से 170 गांव प्रभावित
Saran Flood: बिहार के सारण जिले में गंडक नदी के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के सात प्रखंडों के करीब 170 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। अब तक 43,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, परसा प्रखंड के कई नए गांवों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर और तटबंधों में कटाव के कारण प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। जरूरतमंद परिवारों को भोजन, सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, कुछ इलाकों में अब भी राहत टीमों के पहुंचने में परेशानी होने की बात सामने आई है।
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सात प्रखंडों के 170 गांव बाढ़ की चपेट में

जिला प्रशासन की अद्यतन रिपोर्ट के मुताबिक, पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर, परसा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंडों में बाढ़ का असर है। रिपोर्ट में करीब 30 पंचायतों के 170 गांव प्रभावित बताए गए हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में प्रभावित आबादी और परिवारों के आंकड़ों में कुछ विसंगतियां हैं। इसलिए इनकी सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। प्रशासन के अनुसार, अब तक 43,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। परसा प्रखंड में बीती रात से कई नए गांवों में पानी घुसने की सूचना है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी लगातार बढ़ रहा है। कुछ बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इस इलाके में पहले इतनी गंभीर बाढ़ नहीं देखी थी।
चार तटबंधों में कटाव, मरम्मत का काम जारी

सारण जिले में अब तक चार स्थानों पर तटबंधों में कटाव होने की जानकारी सामने आई है। इन स्थानों पर मरम्मत का काम चल रहा है। तटबंधों में कटाव के कारण बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, तटबंधों की स्थिति और रखरखाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी की गई है। तीन अभियंताओं को निलंबित किए जाने और कारण बताओ नोटिस जारी होने की जानकारी दी गई है। प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों को प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखने और आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और मेडिकल टीमों से मदद

बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए राहत केंद्र और सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 20 चिकित्सा शिविर और पांच मोबाइल मेडिकल यूनिट काम कर रही हैं। बीमार लोगों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 14 राहत केंद्र संचालित हैं। सामुदायिक रसोई के माध्यम से अब तक 50,550 लोगों को भोजन कराया गया है। इसके अलावा 2,650 फूड पैकेट और ड्राई राशन पैकेट वितरित किए गए हैं। प्रभावित परिवारों के बीच 9,947 पॉलीथिन शीट भी बांटी गई हैं। बाढ़ प्रभावित पशुओं के इलाज के लिए आठ पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में अब तक 370 पशुओं का उपचार किया गया है, जबकि 153.5 क्विंटल पशु चारा वितरित किया गया है।
बिजली और मोबाइल नेटवर्क ठप, सांप-बिच्छुओं से भी खतरा
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बिजली नहीं होने के कारण कई जगह मोबाइल नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इससे बाहरी दुनिया से संपर्क करना और मदद मांगना मुश्किल हो रहा है। पानी घरों और आसपास के इलाकों में फैलने के कारण सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं के घरों में घुसने का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि दिन किसी तरह गुजर जाता है, लेकिन रात में स्थिति अधिक मुश्किल हो जाती है। पिछले 24 घंटे में बाढ़ के पानी में डूबने से तीन लोगों की मौत होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा और समय पर राहत पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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NDRF-SDRF की टीमें तैनात, राहत अभियान जारी
बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। नावों से बचाव अभियान चलाया जा रहा है और हेलीकॉप्टर के माध्यम से भी राहत सामग्री तथा फूड पैकेट गिराए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर, आवागमन और प्रभावित लोगों की जरूरतों के अनुसार राहत कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, परसा समेत कई इलाकों में लगातार बढ़ते पानी के कारण स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। फिलहाल, सारण में बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित ठिकाने, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की चुनौती बनी हुई है।






















