धनबाद: बाघमारा स्थित सिजुआ खेल स्टेडियम, जिसका निर्माण लगभग चार दशक पूर्व बीसीसीएल एरिया–05 सिजुआ प्रबंधन द्वारा किया गया था। एक समय यह स्टेडियम देश के कोने-कोने से आए खिलाड़ियों का प्रमुख केंद्र रहा, लेकिन आज इसकी बदहाली के लिए खुद बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
इस स्टेडियम पर फिलहाल दो बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। पहला—रखरखाव के लिए जरूरी जलापूर्ति का लंबे समय से ठप होना। पानी के अभाव में मैदान की हरी-भरी घास पूरी तरह सूख चुकी है। जहां कभी खेल प्रतिभाओं ने अपना हुनर दिखाया, आज वही मैदान उजाड़ नजर आ रहा है। सुनहरी यादों को समेटे यह स्टेडियम अब अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर आज स्टेडियम परिसर में सांकेतिक सत्याग्रह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के नेता और स्थानीय गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में बीसीसीएल प्रबंधन पर मनमानी रवैया अपनाने और इस धरोहर की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए।
अब बात उस दूसरे खतरे की, जो सिर्फ एक स्टेडियम नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है।
स्टेडियम की देखरेख में वर्षों से लगे माली सोमनाथ बारिक, जिन्होंने अपनी किशोरावस्था से ही इस मैदान की सेवा की है। निजी मजदूर के तौर पर कार्यरत सोमनाथ को बीसीसीएल द्वारा तय मजदूरी दी जाती थी, लेकिन बीते करीब तीन वर्षों से उनका वेतन बकाया है।
आर्थिक तंगी के कारण सोमनाथ के परिवार की हालत बद से बदतर हो चुकी है। त्योहार उनके लिए खुशियां नहीं, बल्कि कर्ज के बोझ को बढ़ाने का कारण बनते जा रहे हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान उनका दर्द आंखों और जुबान से छलक पड़ा। हालांकि उन्होंने आस्था जताते हुए कहा कि उन्हें भगवान जगन्नाथ पर भरोसा है और एक दिन उनका बकाया जरूर मिलेगा।
सिजुआ खेल स्टेडियम की बदहाली हो या माली सोमनाथ बारिक की दयनीय स्थिति—दोनों के लिए जिम्मेदार बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ अब आमजन खुलकर सामने आ चुके हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कुंभकर्णी नींद में सोए बीसीसीएल अधिकारियों के कानों तक यह आवाज़ कब तक पहुंचती है, और क्या इस आंदोलन से न सिर्फ एक ऐतिहासिक स्टेडियम, बल्कि उससे जुड़े एक परिवार का आशियाना भी बच पाएगा






















