झरिया: जोडापोखर थाना क्षेत्र के सेल जीतपुर कोलियरी क्षेत्र में वित्त और मानव संसाधन विभाग की लापरवाही के कारण मजदूरों को अपने ही हक के लिए वर्षों तक भटकना पड़ रहा है। भविष्य निधि और पेंशन से जुड़ी सैकड़ों फाइलें धूल फांक रही हैं, जिससे श्रमिकों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि एक टेबल से दूसरे टेबल तक फाइल पहुंचने में ही 8 से 10 साल लग जा रहे हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।मजदूर जब भी भविष्य निधि और पेंशन की जानकारी लेने कार्यालय पहुंचते हैं, तो हर बार उन्हें नया दस्तावेज लाने के नाम पर वापस लौटा दिया जाता है। एक कागज जुटाने में महीनों लग जाते हैं, और अगली बार कोई नया कागज मांग लिया जाता है।नियमों के अनुसार भविष्य निधि और पेंशन मजदूर का वैधानिक अधिकार है। सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित समय सीमा में भुगतान अनिवार्य है। भविष्य निधि असंगठित मजदूर की जमा पूंजी होती है, जबकि पेंशन उनके जीवनयापन का मुख्य आधार है। भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है और ब्याज सहित भुगतान का भी प्रावधान है। इसके बावजूद जीतपुर कोलियरी में इन नियमों की अनदेखी हो रही है। कई बार आंदोलन, धरना और शिविर आयोजित किए गए, लेकिन हालात नहीं बदले। कई मजदूर अपनी पेंशन का इंतजार करते चल बसे, वहीं कुछ परिवारों में पति पत्नी दोनों की मृत्यु हो चुकी है। उनके बच्चे अब बालिग हो चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें भविष्य निधि और पेंशन का लाभ नहीं मिल सका है।मंगलवार को जनता श्रमिक संघ असंगठित मजदूर के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य प्रबंधक से मुलाकात कर मुद्दा उठाया।वार्ता में के डी पांडेय, प्रदीप सिन्हा, असित सरकार, साजन सिंह, टोकनाथ तिवारी और रविंद्र कुमार गोप शामिल थे।






















