जाकिर हुसैन पार्क और स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क उपेक्षा के शिकार, प्रशासन की अनदेखी से जनता नाराज़
रांची। राजधानी रांची में स्थित दो प्रमुख सार्वजनिक पार्क—डॉ. जाकिर हुसैन पार्क (नागा बाबा खटाल के पास) और स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क (कोकर)—इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं। कभी बच्चों की किलकारियों और बुजुर्गों की सैरगाह के रूप में पहचान रखने वाले ये पार्क अब असामाजिक गतिविधियों के अड्डे बन चुके हैं।
Highlights:
डॉ. जाकिर हुसैन पार्क: बच्चों के झूले टूटे, चारों तरफ झाड़ियां और गंदगी
एक समय बच्चों के मनोरंजन का केंद्र रहा डॉ. जाकिर हुसैन पार्क आज बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है।
- बच्चों के झूले पूरी तरह टूट चुके हैं।
- बैठने के लिए बनाए गए बेंच खंडहर बन चुके हैं।
- जानवरों के पुतले जो कभी बच्चों को आकर्षित करते थे, अब टूटे-फूटे कोनों में पड़े हैं।
- पार्क की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
- टॉय ट्रेन और अन्य झूले जंग खा रहे हैं।
यहाँ तक कि पेड़ों और झाड़ियों की अनियंत्रित बढ़ोतरी ने इसे सुनसान बना दिया है, जिससे असामाजिक तत्वों को यहां डेरा जमाने का मौका मिल रहा है।
स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क: तालाब बना कचरे का ढेर, प्रवेश द्वार बना यूरिनल
कोकर स्थित स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क की स्थिति और भी भयावह है:
- पार्क का मुख्य द्वार ही गंदगी और बदबू का केंद्र बन चुका है।
- लोग खुलेआम वहां पेशाब कर रहे हैं।
- पार्क का तालाब कूड़े-कचरे से भर चुका है और साफ-सफाई का कोई नामोनिशान नहीं है।
- जुआ खेलने वाले और नशा करने वाले लोगों ने पार्क में स्थाई अड्डा बना लिया है।
स्थानीय निवासियों की शिकायत के बावजूद नगर निगम और प्रशासन की अनदेखी ने स्थिति को और खराब कर दिया है।
जनता की नाराज़गी, बच्चों और बुजुर्गों का पार्क में जाना हुआ बंद
इन पार्कों में अब न तो परिवारों का आना-जाना रह गया है और न ही बच्चों की किलकारी सुनाई देती है। महिलाएं और बुजुर्ग अब इन पार्कों में जाने से डरते हैं। पार्कों में बढ़ते असामाजिक तत्वों की वजह से लोग अब इसे खतरनाक इलाका मानने लगे हैं।
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प्रशासन कब जागेगा?
स्थानीय लोगों की मांग है कि:
- पार्कों की साफ-सफाई और मरम्मत जल्द शुरू हो।
- CCTV कैमरे और गार्ड की व्यवस्था की जाए।
- असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई हो।
रांची जैसे स्मार्ट सिटी की पहचान वाले शहर में इस तरह से सार्वजनिक स्थानों की उपेक्षा शहर की छवि को धूमिल कर रही है। जरूरत है प्रशासन के सजग और त्वरित एक्शन की, ताकि शहरवासी फिर से खुलकर इन पार्कों का आनंद ले सकें।






















