न्यायालय और मजिस्ट्रेट की देखरेख में हुआ निष्पादन, सत्य की हुई जीत
बिहार में एक लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई का गुरुवार को निष्कर्ष निकल गया, जब 12 साल पुराने किरायेदारी विवाद में कोर्ट के आदेश के तहत असली मालिक को उनकी दुकान का कब्जा मिला। मजिस्ट्रेट और पुलिस की उपस्थिति में निष्पादन की प्रक्रिया पूरी की गई।
Highlights:
12 साल बाद मिला न्याय, न्यायिक आदेश और मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पूरी हुई निष्पादन प्रक्रिया-दुकान पर मिला मालिकाना हक
गया जिले के दिलीप कुमार बिट को 12 साल के लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय से उनकी दुकान का अधिकार मिला। यह मामला वर्ष 2012 में तब शुरू हुआ जब दिलीप बिट के पिता द्वारा सत्यनारायण अग्रवाल को किराए पर दी गई दुकान खाली करने को कहा गया, लेकिन अग्रवाल ने दुकान खाली करने से इंकार कर दिया। मजबूरन दिलीप बिट को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
न्यायिक प्रक्रिया और संघर्ष की कहानी
वर्ष 2019 में ही गया सिविल कोर्ट के जूनियर डिवीजन के जज सुरेश उरांव ने दिलीप बिट के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन इसके बावजूद दुकान का कब्जा मिलने में उन्हें और 6 साल इंतजार करना पड़ा। इस दौरान सत्यनारायण अग्रवाल ने लोअर कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक याचिकाएं दाखिल कीं, लेकिन हर जगह उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
मृत्यु के बाद बेटे को सौंपा गया अधिकार
दिलीप बिट द्वारा दायर की गई याचिका के दौरान ही उनका निधन हो गया। इसके बाद गुरुवार को मजिस्ट्रेट की निगरानी और कोर्ट की देखरेख में निष्पादन की प्रक्रिया पूरी की गई। दुकान की चाबी अब दिलीप बिट के बेटे देवाशीष बिट को सौंपी गई।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच एक बार फिर न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ाया है। कई लोगों ने कहा कि भले ही न्याय में समय लगता है, लेकिन अंततः सत्य की जीत होती है।






















