जमुआ:जमुआ प्रखंड अंतर्गत पंच मंदिर परिसर में स्थित दुर्गा मंडप इस वर्ष भी 57वीं बार अपने दुर्गा पूजा और मेले के आयोजन से श्रद्धालुओं और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। 1968 से लगातार आयोजित हो रहे इस पूजा महोत्सव ने आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता की एक मिसाल कायम की है।
Highlights:
इतिहास से वर्तमान तक: पंच मंदिर दुर्गा पूजा की यात्रा
पूजा समिति के वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र राय ने जानकारी दी कि जमुआ दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1968 में हुई थी, जब तत्कालीन बीडीओ रमाकांत वर्मा ने पंच मंदिर परिसर में दुर्गा मंडप की स्थापना करवाई थी। उनकी धर्मपत्नी लीलावती वर्मा ने प्रथम वर्ष की पूजा में कलश स्थापना की थी।
यह पूजा स्थल न केवल जमुआ, बल्कि आसपास के क्षेत्र की दुर्गा पूजा परंपरा की जड़ है। यहीं से पूजा की परंपरा का विस्तार अन्य गांवों तक हुआ।
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन श्रद्धा का उमड़ा सैलाब
सप्तमी तिथि को मां दुर्गा की भव्य पूजा और अर्चना धूमधाम से की जाती। पूजा पंडाल की सजावट और आकर्षक लाइटिंग देखते ही बन रही है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु पूजा और मेले में सम्मिलित हुए।
मेले और सजावट का आकर्षण बना जमुआ का केंद्र
पूरे जमुआ चौक बाजार से लेकर विभिन्न प्रमुख मार्ग जैसे:
- जमुआ–गिरिडीह वाया द्वारपहरी रोड
- जमुआ–पचंबा वाया चितरडीह रोड
- जमुआ–देवघर वाया चकाई रोड
- जमुआ–कोडरमा वाया खोरीमहुआ रोड
…को दिव्य रोशनी और सजावट से सजाया गया है। इन सड़कों की जगमगाहट श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
जनसहयोग से कार्यक्रम की भव्यता
इस वर्ष के आयोजन में स्थानीय नवयुवकों ने उत्साहपूर्वक सहयोग कर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवाओं के इस सकारात्मक योगदान से समाज में सामूहिकता और संस्कृति के प्रति जुड़ाव स्पष्ट दिखाई देता है।
इन गांवों से आती है श्रद्धालुओं की भीड़:
- हरला
- दुम्मा
- पेटहंडी
- पोबी
- धुरैता
- बाटी
- नावाडीह
- चितरडीह
- चरघरा
…और दर्जनों अन्य गांवों से लोग माता के दर्शन और मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं।






















