छत्तीसगढ़: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत सरकार नक्सलियों से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि नक्सलियों के पास अब केवल “आत्मसमर्पण या परिणाम भुगतने” का विकल्प है।
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अमित शाह ने यह भी ऐलान किया कि केंद्र की योजना के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा।
सख्त रुख: ‘हथियार डालो या भुगतो परिणाम’
एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा,
“कुछ लोग बातचीत की बात करते हैं, लेकिन सरकार की नीति स्पष्ट है — हथियार डालो या परिणाम भुगतो।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसी भी सशस्त्र विद्रोह से समझौता नहीं करेगी।
आत्मसमर्पण नीति और पुनर्वास का वादा
अमित शाह ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए एक आकर्षक पुनर्वास नीति बनाई गई है। इसके तहत उन्हें मुख्यधारा में शामिल होकर सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि अब तक 10,500 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी हथियार छोड़कर लौटना चाहता है, सरकार उसके पुनर्वास में मदद करेगी। लेकिन हिंसा का रास्ता चुनने वालों को सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का सामना करना होगा।
नक्सलवाद की जड़: विकास की कमी
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार मानती है कि नक्सलवाद की जड़ विकास की कमी में है। उन्होंने कहा,
“हम विकास के जरिए बस्तर और पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को समृद्ध बनाना चाहते हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाएं अब गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही हैं।”
सरकार की प्रतिबद्धता
अमित शाह ने कहा कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर बस्तर और अन्य प्रभावित इलाकों को नक्सलमुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है।






















